यूपी बीजेपी अध्यक्ष चुनाव: 12 दिसंबर 2025, लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीजेपी में सत्ता का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो चुका है, और अब नई कमान सौंपने की घड़ी करीब आ गई है। 14 दिसंबर को होने वाले आंतरिक चुनाव में नामांकन की अंतिम तारीख 13 दिसंबर दोपहर 1 से 2 बजे तक है। पार्टी के केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े लखनऊ पहुंच चुके हैं

यूपी बीजेपी अध्यक्ष चुनाव क्यों OBC नेता? राजनीतिक रणनीति का खेल
- बीजेपी ने हमेशा जातिगत समीकरणों को साधने में महारत हासिल की है।
- 2017 में केशव प्रसाद मौर्य (OBC) को अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने 312 सीटें जीतीं, तो 2022 में
- स्वतंत्र देव सिंह (OBC) ने संगठन को मजबूत किया। लेकिन हाल के लोकसभा
- चुनावों में OBC वोटों का कुछ हिस्सा सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)
- फॉर्मूले की ओर खिसक गया। अब, पंचायत चुनावों से पहले OBC चेहरे को
- आगे लाकर बीजेपी गैर-यादव OBCs को फिर से लुभाना चाहती है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले स्तर पर भी OBC जिलाध्यक्षों की संख्या बढ़ाई गई है। यह कदम सपा के अखिलेश यादव को काउंटर करने का है, जो OBC एकजुटता पर जोर दे रहे हैं।

फ्रंट-रनर्स: ये OBC दिग्गज मैदान में, कौन जीतेगा?
चर्चा में तीन बड़े नाम प्रमुख हैं, जो OBC समुदाय से हैं और संगठन में अपनी पकड़ रखते हैं। आइए, एक नजर डालें:
स्वतंत्र देव सिंह (कुर्मी OBC):
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान कैबिनेट मंत्री। 2022 में उन्होंने संगठन को मजबूत किया, खासकर पूर्वांचल में।
उनके समर्थक कहते हैं कि स्वतंत्र देव का अनुभव 2027 चुनावों के लिए परफेक्ट है। लेकिन विपक्षी गुट
उन्हें ‘पुराना चेहरा’ मानते हैं। अगर उनका नाम आया, तो पूर्वांचल की राजनीति में हलचल मचेगी –
सपा के राजभर समुदाय को चुनौती मिलेगी।
धर्मपाल सिंह (लोधी OBC):
पशुपालन मंत्री और संगठन के कद्दावर नेता। वे ग्रामीण OBC बेल्ट में लोकप्रिय हैं, खासकर बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र में।
हाल ही में जिला अध्यक्षों की लिस्ट में OBC फोकस उनके प्रयासों का नतीजा माना जा रहा है। इंडिया टीवी न्यूज के
अनुसार, उनका नाम सबसे मजबूत दावेदारों में शुमार है। अगर वे चुने गए, तो किसान-आधारित OBC वोटरों को
मजबूत संदेश जाएगा। लेकिन केशव मौर्य गुट उनके खिलाफ हो सकता है।
बीएल वर्मा (लोधी OBC)
: राज्यसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री। वे केंद्र में योगी सरकार के लिए ब्रिज का काम करते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स
में उनके नाम का जिक्र प्रमुखता से है। वर्मा का चयन होने पर पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर OBC इमेज मिलेगी, लेकिन
स्थानीय संगठन में उनकी पकड़ पर सवाल उठ सकते हैं।
अन्य नामों में राम शंकर कठेरिया (दलित) और विद्या सागर सोनकर (दलित) भी चर्चा में हैं, लेकिन OBC फोकस के
चलते वे पीछे हैं। आर्थिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि भूपेंद्र चौधरी (जाट OBC) के बाद भी OBC चेन जारी रहेगी।
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यूपी बीजेपी अध्यक्ष चुनाव लाइव अपडेट्स: क्या हो रहा है ग्राउंड पर?
- 11 दिसंबर शाम: दिल्ली में हाईकमान बैठक। अमित शाह और जेपी नड्डा ने योगी से फीडबैक लिया। OBC पर सहमति बनी।
- 12 दिसंबर सुबह: लखनऊ में पर्यवेक्षक तावड़े का दौरा। ‘प्रांतीय परिषद’ की लिस्ट जारी, जिसमें OBC प्रतिनिधि बढ़े।
- 13 दिसंबर: नामांकन का दिन। पार्टी मुख्यालय में हलचल। समर्थक बैनर लगाने लगे।
- 14 दिसंबर: चुनाव। वोटिंग के बाद रिजल्ट।
- 16 दिसंबर से पहले: ऐलान की उम्मीद, खरमास से पहले।
सोशल मीडिया पर #UPBJPPrezElection ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स OBC चेहरा चुनने की तारीफ कर रहे, लेकिन कुछ कह रहे – “पुराने चेहरे ही क्यों?”
राजनीतिक भूचाल: सपा-अखिलेश क्यों परेशान?
यह चुनाव सिर्फ बीजेपी का नहीं, पूरे यूपी का है। अगर OBC अध्यक्ष बना, तो सपा का PDA फॉर्मूला कमजोर पड़ेगा। अखिलेश यादव
ने ट्वीट किया, “बीजेपी जाति की राजनीति छोड़ दे।” लेकिन बीजेपी के लिए यह मास्टरस्ट्रोक है – 2026 पंचायत में OBC पंचायत
प्रमुखों को साधना आसान होगा। विपक्षी विश्लेषक कहते हैं, “OBC चैंपियन का नाम सुनकर यादव वोट एकजुट हो सकता है।”
निष्कर्ष: नया दौर, नया चेहरा
यूपी बीजेपी का यह चुनाव संगठन की दशा-दिशा तय करेगा। OBC नेता का चयन मोदी-योगी की रणनीति का हिस्सा है – गैर-यादव OBCs को वापस लाना। चाहे स्वतंत्र देव हों, धर्मपाल या वर्मा – नाम सुनकर राजनीति हिलेगी, क्योंकि यह 2027 का रोडमैप है। लाइव अपडेट्स के लिए बने रहें। कौन बनेगा चैंपियन? कमेंट्स में बताएं!
12 दिसंबर 2025, लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीजेपी में सत्ता का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो चुका है, और अब नई कमान सौंपने की घड़ी करीब आ गई है। 14 दिसंबर को होने वाले आंतरिक चुनाव में नामांकन की अंतिम तारीख 13 दिसंबर दोपहर 1 से 2 बजे तक है। पार्टी के केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े लखनऊ पहुंच चुके हैं, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय राज्य चुनाव अधिकारी के रूप में प्रक्रिया की कमान संभाले हुए हैं।
- लेकिन असली सस्पेंस तो यह है – कौन सा OBC चेहरा बनेगा यूपी बीजेपी का नया
- चैंपियन’? सूत्रों का कहना है कि यह फैसला 16 दिसंबर से पहले आ सकता है, और
- नाम सुनते ही राज्य की राजनीति में भूचाल आ जाएगा। 2026 के पंचायत चुनाव और
- 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी OBC कार्ड खेलने को तैयार है।
क्यों OBC नेता? राजनीतिक रणनीति का खेल
बीजेपी ने हमेशा जातिगत समीकरणों को साधने में महारत हासिल की है। 2017 में केशव प्रसाद मौर्य (OBC) को अध्यक्ष
बनाकर पार्टी ने 312 सीटें जीतीं, तो 2022 में स्वतंत्र देव सिंह (OBC) ने संगठन को मजबूत किया। लेकिन हाल के लोकसभा
चुनावों में OBC वोटों का कुछ हिस्सा सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की ओर खिसक गया। अब, पंचायत
चुनावों से पहले OBC चेहरे को आगे लाकर बीजेपी गैर-यादव OBCs को फिर से लुभाना चाहती है। हिंदुस्तान टाइम्स की
रिपोर्ट के मुताबिक, जिले स्तर पर भी OBC जिलाध्यक्षों की संख्या बढ़ाई गई है। यह कदम सपा के अखिलेश यादव को
काउंटर करने का है, जो OBC एकजुटता पर जोर दे रहे हैं।
फ्रंट-रनर्स: ये OBC दिग्गज मैदान में, कौन जीतेगा?
चर्चा में तीन बड़े नाम प्रमुख हैं, जो OBC समुदाय से हैं और संगठन में अपनी पकड़ रखते हैं। आइए, एक नजर डालें:
स्वतंत्र देव सिंह (कुर्मी OBC)
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान कैबिनेट मंत्री। 2022 में उन्होंने संगठन को मजबूत किया, खासकर पूर्वांचल में।
उनके समर्थक कहते हैं कि स्वतंत्र देव का अनुभव 2027 चुनावों के लिए परफेक्ट है। लेकिन विपक्षी गुट उन्हें ‘पु
राना चेहरा’ मानते हैं। अगर उनका नाम आया, तो पूर्वांचल की राजनीति में हलचल मचेगी – सपा के राजभर
समुदाय को चुनौती मिलेगी।
धर्मपाल सिंह (लोधी OBC):
पशुपालन मंत्री और संगठन के कद्दावर नेता। वे ग्रामीण OBC बेल्ट में लोकप्रिय हैं, खासकर बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र में।
हाल ही में जिला अध्यक्षों की लिस्ट में OBC फोकस उनके प्रयासों का नतीजा माना जा रहा है। इंडिया टीवी न्यूज के अनुसार
, उनका नाम सबसे मजबूत दावेदारों में शुमार है। अगर वे चुने गए, तो किसान-आधारित OBC वोटरों को मजबूत संदेश
जाएगा। लेकिन केशव मौर्य गुट उनके खिलाफ हो सकता है।
बीएल वर्मा (लोधी OBC):
राज्यसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री।
वे केंद्र में योगी सरकार के लिए ब्रिज का काम करते हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स में उनके नाम का जिक्र प्रमुखता से है।
वर्मा का चयन होने पर पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर OBC इमेज मिलेगी,
लेकिन स्थानीय संगठन में उनकी पकड़ पर सवाल उठ सकते हैं।
अन्य नामों में राम शंकर कठेरिया (दलित) और विद्या सागर सोनकर (दलित) भी चर्चा में हैं, लेकिन OBC फोकस के चलते वे
पीछे हैं। आर्थिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि भूपेंद्र चौधरी (जाट OBC) के बाद भी OBC चेन जारी रहेगी।
लाइव अपडेट्स: क्या हो रहा है ग्राउंड पर?
- 11 दिसंबर शाम: दिल्ली में हाईकमान बैठक। अमित शाह और जेपी नड्डा ने योगी से फीडबैक लिया। OBC पर सहमति बनी।
- 12 दिसंबर सुबह: लखनऊ में पर्यवेक्षक तावड़े का दौरा। ‘प्रांतीय परिषद’ की लिस्ट जारी, जिसमें OBC प्रतिनिधि बढ़े।
- 13 दिसंबर: नामांकन का दिन। पार्टी मुख्यालय में हलचल। समर्थक बैनर लगाने लगे।
- 14 दिसंबर: चुनाव। वोटिंग के बाद रिजल्ट।
- 16 दिसंबर से पहले: ऐलान की उम्मीद, खरमास से पहले।
सोशल मीडिया पर #UPBJPPrezElection ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स OBC चेहरा चुनने की तारीफ कर रहे, लेकिन
कुछ कह रहे – “पुराने चेहरे ही क्यों?”
राजनीतिक भूचाल: सपा-अखिलेश क्यों परेशान?
यह चुनाव सिर्फ बीजेपी का नहीं, पूरे यूपी का है। अगर OBC अध्यक्ष बना, तो सपा का PDA फॉर्मूला कमजोर पड़ेगा।
अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “बीजेपी जाति की राजनीति छोड़ दे।” लेकिन बीजेपी के लिए यह मास्टरस्ट्रोक है
– 2026 पंचायत में OBC पंचायत प्रमुखों को साधना आसान होगा। विपक्षी विश्लेषक कहते हैं, “OBC चैंपियन
का नाम सुनकर यादव वोट एकजुट हो सकता है।”
निष्कर्ष: नया दौर, नया चेहरा
यूपी बीजेपी का यह चुनाव संगठन की दशा-दिशा तय करेगा। OBC नेता का चयन मोदी-योगी की रणनीति का हिस्सा है –
गैर-यादव OBCs को वापस लाना। चाहे स्वतंत्र देव हों, धर्मपाल या वर्मा – नाम सुनकर राजनीति हिलेगी, क्योंकि
यह 2027 का रोडमैप है। लाइव अपडेट्स के लिए बने रहें। कौन बनेगा चैंपियन? कमेंट्स में बताएं!