बिहार चुनाव 2025: बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है। विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में ही सत्ताधारी NDA गठबंधन को कड़ा इम्तिहान देना पड़ रहा है। खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 11 मंत्रियों की किस्मत दांव पर लगी हुई है, जबकि दोनों उपमुख्यमंत्री – सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा – की सीटें भी जोखिम भरी नजर आ रही हैं। 6 नवंबर को होने वाले पहले चरण के मतदान में 121 विधानसभा क्षेत्रों पर वोटिंग होगी, जहां विपक्षी महागठबंधन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आक्रामक रुख अपना रहा है। इस आर्टिकल में हम बिहार चुनाव 2025 के इन हॉट सीट्स, उम्मीदवारों की चुनौतियों और राजनीतिक समीकरणों को गहराई से समझेंगे।

अगर आप बिहार की सियासत के जानकार बनना चाहते हैं, तो अंत तक पढ़ें।
बिहार चुनाव 2025 का बैकग्राउंड: NDA vs महागठबंधन का महायुद्ध
बिहार विधानसभा के 243 सीटों पर सियासी जंग छिड़ी है। चुनाव आयोग ने 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में वोटिंग का ऐलान किया है, जबकि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। वर्तमान में NDA के पास बहुमत है – BJP के 78 विधायक, JD(U) के 45 और सहयोगी दलों के 9, कुल 132 सीटें। वहीं, महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल) के पास 75 से ज्यादा सीटें हैं।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA विकास, कानून-व्यवस्था और कल्याण योजनाओं पर जोर दे रहा है। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी, पलायन और महंगाई जैसे मुद्दों को उठाकर युवाओं को लामबंद किया है। हाल ही में महागठबंधन ने तेजस्वी को CM फेस घोषित किया, तो VIP प्रमुख मुकेश साहनी को डिप्टी CM का दावा दिया। BJP ने 101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जिसमें कई सिटिंग विधायकों का टिकट काटा गया है। यह फैसला एंटी-इनकंबेंसी से निपटने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। लेकिन पहले चरण में ही 11 BJP मंत्रियों और दोनों डिप्टी CM की सीटें खतरे में हैं, जो NDA की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
BJP के 11 मंत्रियों की सीटें: कौन-कौन दांव पर?
पहले चरण में BJP के 11 मंत्री मैदान में हैं, जिनकी जीत-हार NDA की ताकत तय करेगी। इनमें से कई पर विपक्ष ने मजबूत दावेदार उतारे हैं। आइए, प्रमुख नामों पर नजर डालें:
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (तारापुर): 2010 के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पिता शकुनी
चौधरी ने यहां 6 बार जीत हासिल की थी। लेकिन RJD ने यहां अनुभवी उम्मीदवार उतारा है, जो जातिगत समीकरण
बिगाड़ सकता है। चौधरी की साख NDA की OBC एकजुटता पर टिकी है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय): विधानसभा स्पीकर रह चुके सिन्हा की सीट पर भी कांटे बिछे
हैं। महागठबंधन ने युवा चेहरे को टिकट दिया है, जो स्थानीय मुद्दों पर आक्रामक है। सिन्हा की हार BJP के ऊपरी
जातियों में असंतोष पैदा कर सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय (सिवान): विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए काउंसिल सीट छोड़ चुके हैं। सिवान में RJD
का मजबूत आधार है, और पांडेय को भ्रष्टाचार के आरोप झेलने पड़ रहे हैं।
सड़क निर्माण मंत्री नितिन नवीन (बांकीपुर): पटना की हाई-प्रोफाइल सीट पर नवीन का मुकाबला कड़ा है।
यहां शहरी मतदाता विकास की उम्मीद लगाए हैं।
कृषि मंत्री प्रेम कुमार (गया टाउन): गया में BJP का गढ़ है, लेकिन विपक्ष ने दलित वोटों को लक्षित किया है।
अन्य मंत्री: राम कृपाल यादव (दानापुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री), नीरज कुमार बाबलू (छातापुर), सुनील कुमार पिंटू
(सीतामढ़ी), राणा रणधीर सिंह (मधुबन), विजय कुमार मंडल (सिकटी) और कृष्णा कुमार ऋषि (बनमंखी)।
ये सभी सीटें जातिगत और स्थानीय मुद्दों से प्रभावित हैं।
इन 11 मंत्रियों की जीत NDA को मजबूती देगी, लेकिन हार से नीतीश सरकार की नींव हिल सकती है।
BJP ने 19 सिटिंग विधायकों का टिकट काटकर नई रणनीति अपनाई है, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ सकता है।
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दोनों डिप्टी CM की साख पर संकट: क्यों है मुश्किल चुनौती?
सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा बिहार सरकार के चेहरे हैं। चौधरी OBC समुदाय से हैं, जबकि सिन्हा ऊपरी जाति के
प्रतिनिधि। दोनों की सीटें पहले चरण में हैं, जो NDA के लिए डबल खतरा है। चौधरी पर RJD का फोकस है, क्योंकि
तारापुर में यादव-मुस्लिम वोटबैंक मजबूत है। सिन्हा की लखीसराय सीट पर भी महागठबंधन ने कमजोरियां ढूंढ ली
हैं – जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में विकास की कमी।
X (पूर्व ट्विटर) पर चर्चा जोरों पर है। BJP नेता दिलीप जायसवाल ने अमित शाह के दौरे को NDA की ताकत बताया,
लेकिन विपक्ष तेजस्वी यादव को CM फेस बनाकर हमला बोल रहा है। अगर ये दोनों हार गए, तो BJP में आंतरिक
कलह बढ़ सकता है।
प्रमुख मुद्दे और रणनीतियां: क्या तय करेगा नतीजा?
मुख्य मुद्दे:
- बेरोजगारी और पलायन: तेजस्वी ने ‘माय बिहार’ कैंपेन से युवाओं को जोड़ा।
- विकास vs जंगलराज: NDA जंगलराज की याद दिला रहा, जबकि महागठबंधन भ्रष्टाचार पर हमलावर।
- जातिगत समीकरण: EBC, दलित और मुस्लिम वोट निर्णायक होंगे।
NDA की रणनीति: PM मोदी 24 अक्टूबर से रैलियां शुरू करेंगे। अमित शाह सिवान-बक्सर में जोर लगाएंगे। BJP
के 40 स्टार प्रचारकों में योगी, शिवराज और भोजपुरी स्टार्स शामिल हैं।
महागठबंधन की चाल: 11 सीटों पर फ्रेंडली फाइट के बावजूद तेजस्वी का CM दावा मजबूत। कांग्रेस-RJD सीट
शेयरिंग पर सहमति बनी, लेकिन VIP का रुख अहम।
निष्कर्ष: बिहार चुनाव 2025 – टर्निंग पॉइंट या स्टेटस क्वो?
बिहार चुनाव 2025 NDA के लिए परीक्षा की घड़ी है। BJP के 11 मंत्रियों और दोनों डिप्टी CM की सीटें न सिर्फ व्यक्तिगत
प्रतिष्ठा का सवाल हैं, बल्कि पूरे गठबंधन की दिशा तय करेंगी। अगर NDA इन सीटों पर मजबूत रहा, तो नीतीश कुमार का
दसवां CM कार्यकाल तय। लेकिन विपक्ष की एकजुटता तेजस्वी को सत्ता की कुंजी सौंप सकती है।
बिहार की जनता विकास, जाति और इतिहास के बीच संतुलन बनाएगी। यह चुनाव न सिर्फ सत्ता का खेल है, बल्कि बिहार
के भविष्य का आईना भी। नतीजों का इंतजार करते हुए, याद रखें – लोकतंत्र में वोट ही सबसे बड़ा हथियार है। NDA जीते
या महागठबंधन, बिहार को नई दिशा मिलनी चाहिए।
बिहार चुनाव 2025 से जुड़े FAQ
1. बिहार चुनाव 2025 कब होंगे?
पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को। मतगणना 14 नवंबर को होगी।
2. BJP के कितने मंत्री पहले चरण में चुनाव लड़ रहे हैं?
11 मंत्री, जिनमें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, सड़क मंत्री नितिन नवीन और कृषि मंत्री प्रेम कुमार शामिल हैं।
3. दोनों डिप्टी CM कौन-सी सीटों से लड़ रहे हैं?
सम्राट चौधरी तारापुर से और विजय सिन्हा लखीसराय से।
4. महागठबंधन का CM फेस कौन है?
तेजस्वी यादव को CM और मुकेश साहनी को डिप्टी CM फेस घोषित किया गया है।
5. NDA की सीट शेयरिंग कैसी है?
BJP 101, JD(U) 101, LJP(RV) 29 और अन्य सहयोगी 12 सीटें लड़ेंगे।
6. बिहार चुनाव 2025 के मुख्य मुद्दे क्या हैं?
बेरोजगारी, पलायन, विकास और कानून-व्यवस्था प्रमुख मुद्दे हैं।