वीडियो वायरल : 12 दिसंबर 2025। संसद का माहौल हमेशा गरम रहता है, लेकिन इस बार धुंए की लकीरों ने आग लगा दी। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर के आरोपों से शुरू हुई ई-सिगरेट की बहस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद सौगाता रॉय को घेर लिया। लोकसभा में एक टीएमसी सांसद पर सदन के अंदर ई-सिगरेट पीने का इल्जाम लगने के चंद घंटों बाद, रॉय खुद संसद परिसर के बाहर ई-सिगरेट के धुएं उड़ाते कैमरे में कैद हो गए। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें तुरंत घेर लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने राजनीतिक दलों के बीच नई जंग छेड़ दी। क्या यह सिर्फ एक सिगरेट का मामला है, या संसद की गरिमा पर सीधा हमला? आइए, इस विवाद की परतें खोलते हैं।

विवाद की शुरुआत: अनुराग ठाकुर का धमाका
सब कुछ गुरुवार को लोकसभा में शुरू हुआ। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने स्पीकर ओम बिरला के समक्ष शिकायत की कि
एक टीएमसी सांसद कई दिनों से सदन के अंदर ई-सिगरेट पी रहा है। उन्होंने कहा, “एक अजीब बदबू आ रही है और भाप
साफ दिखाई दे रही है। क्या संसद में धूम्रपान की इजाजत है?” ठाकुर ने याद दिलाया कि भारत में ई-सिगरेट्स पर 2019 में
पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। यह प्रतिबंध सार्वजनिक स्थानों पर भी लागू होता है, जिसमें संसद भवन शामिल है।स्पीकर
बिरला ने तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “अगर ऐसी कोई शिकायत लिखित रूप में आती है, तो सीसीटीवी
फुटेज चेक कर एक्शन लिया जाएगा। संसद की गरिमा सर्वोपरि है।” सदन में हंगामा मच गया। बीजेपी सांसदों ने खड़े होकर
समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया। लेकिन असली तूफान तो बाहर आने वाला था।
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वायरल वीडियो: सौगाता रॉय की बेफिक्री
- लोकसभा की बहस खत्म होते ही संसद परिसर के बाहर का सीन वायरल हो गया।
- टीएमसी के दिग्गज सांसद सौगाता रॉय खुले में खड़े होकर ई-सिगरेट पीते नजर आए।
- तभी केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और गजेंद्र सिंह शेखावत वहां पहुंचे। वीडियो में
- साफ दिख रहा है कि गिरिराज सिंह ने रॉय को ललकारा, “यह क्या हो रहा है?
- संसद परिसर में ई-सिगरेट पीना गैरकानूनी है। 2019 का कानून याद है?”
- शेखावत ने भी जोड़ा, “सार्वजनिक जगह पर धूम्रपान प्रतिबंधित है, चाहे सांसद हो या कोई और।”
रॉय ने बिना घबराए जवाब दिया, “मैं खुले में हूं, भवन के अंदर नहीं। बाहर धूम्रपान की इजाजत है। आप लोग क्या पुलिस हैं?” उनकी यह बयानबाजी वीडियो में कैद हो गई, जो ट्विटर (अब एक्स) पर लाखों बार शेयर हो चुकी है। यूजर्स ने मीम्स बनाए, कुछ ने रॉय को “कूल सांसद” कहा तो कुछ ने “नियम तोड़ने वाला”। टीएमसी समर्थकों ने इसे बीजेपी का “ओवरएक्टिंग” बताया, जबकि बीजेपी ने इसे विपक्ष की “नैतिक दिवालियापन” की मिसाल ठहराया।
वीडियो वायरल गिरिराज सिंह की तीखी प्रतिक्रिया: “अध्यक्ष ने बचा लिया, वरना बेनकाब हो जाते”
विवाद बढ़ते ही गिरिराज सिंह ने मीडिया को तीखा ताना दिया। उन्होंने कहा, “अनुराग ठाकुर ने सही मुद्दा उठाया। ई-सिगरेट 2019
से बैन है, और सदन में पीना तो संसद की गरिमा पर थूकना है। सौगाता रॉय का व्यवहार देखिए – वे तो खुले में भी नियम तोड़ रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय ने उन्हें बचा लिया, वरना कई लोग बेनकाब हो जाते। टीएमसी को संसद का सम्मान समझ ही नहीं आता।” सिंह ने
इसे विपक्ष की “अनुशासनहीनता” का प्रतीक बताया और कहा कि बीजेपी लिखित शिकायत देगी। गजेंद्र शेखावत ने भी साथ दिया,
“सांसदों को कानून का पालन करना चाहिए। यह सिर्फ सिगरेट का मुद्दा नहीं, लोकतंत्र की मर्यादा का सवाल है।” दूसरी ओर, रॉय
ने सफाई दी, “धूम्रपान को राजनीतिक न बनाएं। मैं बाहर था, कोई समस्या नहीं।” लेकिन वीडियो ने उनके दावे को कमजोर कर
दिया, क्योंकि संसद परिसर को भी पब्लिक प्लेस माना जाता है।
वीडियो वायरल राजनीतिक निहितार्थ: बंगाल की जंग संसद तक?
- यह विवाद महज एक घटना नहीं, बल्कि बीजेपी-टीएमसी के बीच बंगाल
- चुनाव की आग का आईना है। 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं
- , और संसद में ऐसे मुद्दे विपक्ष को घेरने का हथियार बन जाते हैं।
- बीजेपी इसे टीएमसी की “अराजकता” के रूप में पेश कर रही है,
- जबकि ममता बनर्जी की पार्टी इसे “बीजेपी का ड्रामा” बता रही।
- सोशल मीडिया पर #E-cigaretteInParliament ट्रेंड कर रहा है
- , जहां यूजर्स संसद को “धूम्रपान मुक्त” बनाने की मांग कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ई-सिगरेट युवाओं के बीच निकोटिन की लत फैला रही है। 2019 का प्रतिबंध
इसी खतरे को रोकने के लिए था। लेकिन सांसदों का ऐसा व्यवहार आम जनता के लिए खराब उदाहरण है।
क्या स्पीकर बिरला की कार्रवाई सख्त होगी? या यह बहस ठंडी पड़ जाएगी?
निष्कर्ष: नियमों का सम्मान जरूरी
सौगाता रॉय का वीडियो वायरल होना संसद की साख पर सवाल उठाता है। गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया ने इसे
राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। सांसदों को कानून सिखाने वाले खुद नियम तोड़ें, तो लोकतंत्र की नींव कैसे मजबूत होगी?
उम्मीद है कि यह घटना सबक बनेगी। तब तक, वीडियो देखते रहिए – धुआं तो निकलेगा ही!