झारखंड में हड़कंप: झारखंड की राजधानी रांची में RIMS DIG ग्राउंड पर बुलडोजर चला दिया गया! अवैध कब्जे हटाने की इस कार्रवाई से इलाके में भारी हड़कंप मच गया। सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए, नारेबाजी और पथराव की घटनाएं हुईं। आखिर क्या है पूरा मामला? क्यों चली प्रशासन की ‘बुलडोजर नीति’? पूरी डिटेल्स जानें और अपडेट रहें!

RIMS DIG ग्राउंड पर बुलडोजर: क्या हुआ आखिर?
रांची के RIMS DIG ग्राउंड पर मंगलवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर चलाया। यह ग्राउंड रांची इंडियन मेडिकल स्कूल (RIMS) और DIG ऑफिस के बीच स्थित है, जो सालों से अवैध अतिक्रमण का शिकार था। नगर निगम और जिला प्रशासन ने दावा किया कि यहां 50 से ज्यादा झुग्गियां और दुकानें अवैध रूप से बनी हुई थीं।
RIMS DIG ग्राउंड पर बुलडोजर कार्रवाई सुबह 6 बजे शुरू हुई, जिसमें 10 बुलडोजर और JCB मशीनें लगीं। 200 परिवार बेघर हो गए। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी है, जो खेल मैदान के रूप में विकसित होगी। लेकिन प्रभावित लोगों ने विरोध जताया- “नोटिस नहीं मिला, न कोई वैकल्पिक जगह!”
विरोध प्रदर्शन: सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग
RIMS DIG ग्राउंड पर बुलडोजर चलते ही गुस्साए ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। रांची-टाटीसिलवे मार्ग जाम हो गया। महिलाएं, बच्चे और युवा नारों के साथ आगे आए- “बुलडोजर बंद करो!”, “घर वापस दो!”। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें 15 लोग घायल हुए। झारखंड मुक्ति मोर्चा और अन्य संगठनों ने हड़ताल का ऐलान किया।
विरोधियों का आरोप: “यह गरीबों पर अत्याचार है। अमीरों के अतिक्रमण पर क्यों नहीं बुलडोजर?” प्रशासन ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन दावा है कि नोटिस नहीं पहुंचे। अब मामला कोर्ट में जाएगा।
क्यों चली बुलडोजर नीति? झारखंड सरकार का स्टैंड
झारखंड सरकार ने RIMS DIG ग्राउंड पर बुलडोजर को ‘साफ-सफाई अभियान’ बताया। CM हेमंत सोरेन
ने कहा, “अवैध कब्जे हटाकर शहर को सुंदर बनाएंगे।” रांची नगर निगम के मुताबिक, यह ग्राउंड 10 एकड़
का है, जो 20 साल से कब्जे में था।
कार्रवाई के बाद पार्क और खेल सुविधाएं बनेंगी।
पिछले महीने रांची में 5 ऐसी कार्रवाइयां हो चुकी हैं। केंद्र की ‘बुलडोजर जस्टिस’ से प्रेरित होकर राज्य
सरकार सक्रिय हुई। लेकिन विपक्ष BJP ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ कहा। प्रभावितों को 10-10 हजार रुपये
सहायता का ऐलान हुआ है।
झारखंड में हड़कंप: प्रभावित लोगों की कहानी: आंसू और गुस्सा
RIMS DIG ग्राउंड पर बुलडोजर से प्रभावित रमिया देवी (45) रोते हुए बोलीं, “30 साल से यहीं रहते हैं।
बच्चे यहीं खेलते थे। अब कहां जाएं?” मजदूर रामू ने कहा, “कोई नोटिस नहीं मिला। सिर्फ 2 घंटे का समय
दिया।” 100 से ज्यादा झुग्गियां ध्वस्त, सामान सड़क पर बिखरा। बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। NGO ने भोजन
और कंबल बांटे।
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प्रशासन ने अस्थायी शेल्टर का वादा किया, लेकिन लोग भरोसा नहीं कर रहे। हाईकोर्ट में PIL दायर हो चुकी है।
आगे क्या? अपडेट और सलाह
RIMS DIG ग्राउंड पर बुलडोजर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। कल फिर विरोध मार्च planned है।
झारखंड सरकार ने कमेटी गठित की, जो 7 दिनों में रिपोर्ट देगी। अगर आप रांची में हैं, तो ट्रैफिक जाम से बचें।
सोशल मीडिया पर #SaveRIMSDIG ट्रेंड कर रहा है।
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