दिल्ली प्रदूषण अलर्ट: सर्दियों का मौसम आते ही दिल्ली फिर से जहरीली हवा के जाल में फंस गई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में 400 पार पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। आनंद विहार, जहांगीरपुरी, रोहिणी जैसे 29 से ज्यादा इलाके रेड जोन में हैं, जहां स्मॉग की मोटी चादर ने शहर को गैस चैंबर में बदल दिया।

दिल्ली प्रदूषण अलर्ट: प्रदूषण के प्रमुख कारण: पराली से वाहनों तक
दिल्ली का प्रदूषण सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर की साझा विफलता है। पराली जलाना, वाहनों का धुआं,
फैक्ट्रियों का उत्सर्जन और निर्माण कार्य मुख्य दोषी हैं। PM2.5 और PM10 कण हवा में घुलकर फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं।
सर्दी में हवा की गति कम होने से ये कण जमीन के करीब रहते हैं, कोहरा मिलकर स्मॉग बनाते हैं। CPCB के अनुसार, दिवाली
के बाद AQI तेजी से बिगड़ा, और दिसंबर में 760 तक पहुंचा।
स्वास्थ्य पर घातक असर: बच्चों से बुजुर्ग तक खतरे में
प्रदूषण की चपेट में बच्चे, बुजुर्ग और सांस रोगी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। डॉक्टर सलाह दे रहे हैं—बाहर न निकलें, N95 मास्क
पहनें, घर पर एयर प्यूरीफायर चलाएं। लंबे समय तक सांस की बीमारियां, हार्ट अटैक और कैंसर का खतरा बढ़ता है।
स्कूल बंद हो गए, ट्रैफिक जाम में लोग घुट रहे हैं। दृश्यता 50 मीटर तक गिर गई, दुर्घटनाएं बढ़ीं। यह सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं,
आर्थिक नुकसान भी है—कामकाज ठप, पर्यटन प्रभावित।
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सरकारी प्रयास और GRAP चरण: क्या काफी है?
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने GRAP लागू किया। स्टेज-2 में डीजल वाहन प्रतिबंधित, निर्माण रुका। IMD ने
बारिश का अलर्ट दिया, जो थोड़ी राहत दे सकती है। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं—
पराली जलाने पर सख्ती, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और ग्रीन जोन बनाने की जरूरत।
सर्दियों का मौसम आते ही दिल्ली फिर से जहरीली हवा के जाल में फंस गई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में
400 पार पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
आनंद विहार, जहांगीरपुरी, रोहिणी जैसे 29 से ज्यादा इलाके रेड जोन में हैं, जहां स्मॉग की मोटी चादर ने शहर को गैस चैंबर
में बदल दिया। लोग आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत से जूझ रहे हैं। यह संकट हर साल दोहराया जा
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प्रदूषण के प्रमुख कारण
दिल्ली का प्रदूषण सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर की साझा विफलता है। पराली जलाना, वाहनों का धुआं, फैक्ट्रियों
का उत्सर्जन और निर्माण कार्य मुख्य दोषी हैं।
PM2.5 और PM10 कण हवा में घुलकर फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। सर्दी में हवा की गति कम होने से ये कण जमीन के करीब रहते
हैं, कोहरा मिलकर स्मॉग बनाते हैं। CPCB के अनुसार, दिवाली के बाद AQI तेजी से बिगड़ा।
स्वास्थ्य पर घातक असर
प्रदूषण की चपेट में बच्चे, बुजुर्ग और सांस रोगी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। डॉक्टर सलाह दे रहे हैं—बाहर न निकलें, N95 मास्क पहनें,
घर पर एयर प्यूरीफायर चलाएं। लंबे समय तक सांस की बीमारियां, हार्ट अटैक और कैंसर का खतरा बढ़ता है।
स्कूल बंद हो गए, ट्रैफिक जाम में लोग घुट रहे हैं। दृश्यता 50 मीटर तक गिर गई।
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सरकारी प्रयास और GRAP चरण
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने GRAP लागू किया। स्टेज-2 में डीजल वाहन प्रतिबंधित, निर्माण रुका।
IMD ने बारिश का अलर्ट दिया, जो थोड़ी राहत दे सकती है। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं—
पराली जलाने पर सख्ती, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा जरूरी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई।
व्यक्तिगत उपाय और समाधान
- मास्क और घरेलू सुरक्षा: N95 मास्क पहनें, खिड़कियां बंद रखें, इनडोर प्लांट्स लगाएं।
- यात्रा: कारपूलिंग करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करें।
- जागरूकता: पराली न जलाएं, कचरा अलग करें, वृक्षारोपण करें।
- मॉनिटरिंग: AQI.in या CPCB ऐप चेक करें।
दिल्लीवासियों, अब बदलाव का वक्त है। अगर हम सब मिलकर कदम उठाएं, तो गैस चैंबर को साफ हवा का शहर बना सकते हैं।
स्वच्छ दिल्ली का सपना साकार हो!
व्यक्तिगत उपाय: खुद शहर बचाएं
- मास्क और घरेलू सुरक्षा: N95 मास्क पहनें, खिड़कियां बंद रखें, इनडोर प्लांट्स जैसे स्नेक प्लांट लगाएं।
- यात्रा: कारपूलिंग करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करें, साइकिलिंग अपनाएं।
- जागरूकता: पराली न जलाएं, कचरा अलग करें, वृक्षारोपण में भाग लें।
- मॉनिटरिंग: AQI.in या CPCB ऐप चेक करें।
दिल्लीवासियों, अब वक्त है बदलाव का। अगर हम सब मिलकर कदम उठाएं,
तो गैस चैंबर को साफ हवा का शहर बना सकते हैं। सरकार, उद्योग और नागरिक—
सबकी जिम्मेदारी है। स्वच्छ दिल्ली का सपना साकार हो, सांसें आसान हों!