राजनीति में बड़ा ट्विस्ट: शिंदे को घेरने के लिए बीजेपी-कांग्रेस का हाथ मिला

राजनीति में बड़ा ट्विस्ट: महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा से सरप्राइज से भरी रही है। कभी सहयोगी एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरते हैं, तो कभी कट्टर दुश्मन सत्ता के लिए हाथ मिला लेते हैं। जनवरी 2026 की शुरुआत में ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में ऐसा ही एक बड़ा ट्विस्ट देखने को मिला, जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन करके एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गई है।

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राजनीति में बड़ा ट्विस्ट: अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के नतीजे और नया समीकरण

दिसंबर 2025 में हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में एकनाथ शिंदे की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। 60 सीटों वाली इस परिषद में शिंदे गुट को 23-27 सीटें (विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार) मिलीं, जो बहुमत से महज कुछ सीटें दूर थी। बीजेपी को 14-16 सीटें, कांग्रेस को 12 और अजित पवार की एनसीपी को 4 सीटें हासिल हुईं। सामान्य रूप से महायुति गठबंधन (बीजेपी-शिंदे सेना-अजित एनसीपी) के तहत शिंदे गुट को सत्ता मिलनी चाहिए थी, लेकिन बीजेपी ने अप्रत्याशित कदम उठाया।

बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम से नया गठबंधन बनाया। इस गठबंधन में बीजेपी के 14-16 पार्षद, कांग्रेस के 12 और एनसीपी के 4 पार्षद शामिल हुए, कुल मिलाकर 32 से ज्यादा का आंकड़ा पार कर बहुमत हासिल कर लिया। नतीजा यह हुआ कि नगर परिषद अध्यक्ष का पद बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल को मिला, जबकि शिंदे गुट की उम्मीदवार मनीषा वालेकर हार गईं। शिंदे गुट, जो सबसे बड़ी पार्टी थी, विपक्ष में बैठने को मजबूर हो गया।

शिंदे गुट की नाराजगी और विश्वासघात के आरोप

शिंदे गुट के नेताओं ने इस गठबंधन को ‘अभद्र युति’ और ‘विश्वासघात’ करार दिया है। अंबरनाथ से शिवसेना विधायक बालाजी किनीकर ने कहा, “कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा देने वाली बीजेपी ने सत्ता की लालच में कांग्रेस से हाथ मिला लिया। यह शिवसेना के साथ बड़ा धोखा है।” शिंदे गुट का कहना है कि उन्होंने बीजेपी के साथ महागठबंधन की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। यह इलाका उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह जिला ठाणे है और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे की लोकसभा सीट कल्याण का हिस्सा है, इसलिए यह झटका शिंदे गुट के लिए व्यक्तिगत भी है।

बीजेपी नेताओं का बचाव है कि अंबरनाथ में शिवसेना के लंबे शासन में भ्रष्टाचार और दादागिरी का माहौल था। बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा, “हमने विकास और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लिए यह गठबंधन किया। शिंदे गुट से बातचीत की कोशिश की, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।”

राज्य स्तर पर महायुति में दरार?

महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन (बीजेपी, शिंदे सेना, अजित एनसीपी) राज्य सरकार चला रहा है,

जहां देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री और शिंदे-अजित पवार उपमुख्यमंत्री हैं। लेकिन निकाय चुनावों

में यह गठबंधन कई जगहों पर बिखर चुका है। अंबरनाथ की घटना ने महायुति में अंतर्कलह की

अफवाहों को हवा दे दी है। पहले भी कई नगर परिषदों में बीजेपी और शिंदे सेना अलग-अलग लड़े

या एक-दूसरे के खिलाफ गठबंधन किए। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत

करने के लिए शिंदे गुट को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है, खासकर आगामी

बीएमसी और अन्य बड़े निकाय चुनावों को देखते हुए।

कांग्रेस ने भी इस गठबंधन को अवसरवादी बताया, लेकिन स्थानीय स्तर पर सत्ता के लिए इसे स्वीकार किया।

एक कांग्रेस नेता ने कहा, “या तो बीजेपी के साथ या शिंदे गुट के साथ, या फिर वोटिंग से दूर रहना –

हमने विकास के लिए बीजेपी चुनी।”

निकाय चुनावों में अनोखे गठबंधन की परंपरा

महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में ऐसे अनोखे गठबंधन नई बात नहीं हैं। पहले भी कई जगहों पर शिंदे

सेना ने कांग्रेस से हाथ मिलाया था बीजेपी को हराने के लिए। अब बीजेपी ने उल्टा कर दिखाया।

जनवरी 2026 में बीएमसी, ठाणे, पुणे समेत कई बड़े नगर निगमों के चुनाव होने हैं, जहां महायुति

एकजुट दिखने की कोशिश कर रही है, लेकिन अंबरनाथ जैसी घटनाएं संदेह पैदा कर रही हैं।

निष्कर्ष: सत्ता की राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं

अंबरनाथ की यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति की अनिश्चितता को दर्शाती है। जहां राज्य स्तर

पर बीजेपी और शिंदे सेना सहयोगी हैं, वहीं स्थानीय स्तर पर सत्ता की भूख सब कुछ बदल देती है।

शिंदे गुट को यह झटका आने वाले चुनावों में कितना नुकसान पहुंचाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

लेकिन एक बात साफ है – महाराष्ट्र की सियासत में अगला ट्विस्ट कभी भी आ सकता है!

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