Bihar Chunav 2025: बिहार में 2025 का चुनावी रण अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है और अब सबकी निगाहें EVM में कैद जनादेश पर टिकी हैं। इस चरण में जिन क्षेत्रों में मतदान हुआ, वहां से मतदाताओं का रुझान यह साफ करता दिखा कि जनता बदलाव भी चाहती है और स्थिर सरकार की उम्मीद भी रखती है।

इस बार का चुनाव खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें कई बड़े चेहरों की किस्मत दांव पर लगी है। राजद नेता तेजस्वी
यादव, जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं समेत दोनों डिप्टी सीएम को लेकर माहौल बेहद गर्म है। यह चरण पूरी तरह से
प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गया है।
Bihar Chunav 2025: तेजस्वी यादव पर नजरें
पहले चरण में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की रही, वह है तेजस्वी यादव का। महागठबंधन की तरफ से मुख्य चेहरा
होने के नाते तेजस्वी ने दर्जनों सभाएँ कीं और युवाओं से रोजगार के सवाल पर सीधा संवाद भी किया।
उन्होंने लगातार यह संदेश देने की कोशिश की कि अगर जनता उन्हें मौका दे, तो वे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को
लेकर निर्णायक बदलाव लाएंगे।
हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन उनकी रैलियों में उमड़े जनसैलाब को केवल “भावनात्मक लहर” बता रहा है। एनडीए
(राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की रणनीति यह रही कि वे शासन की स्थिरता और विकास परियोजनाओं के दम
पर जनता को रिझाएं।
डिप्टी सीएम भी दांव पर
पहले चरण में जिन क्षेत्रों में मतदान हुआ है, उनमें दोनों उपमुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। इन नेताओं ने
अपने-अपने इलाकों में पूरी ताकत झोंक दी, ताकि वे केंद्र और प्रदेश दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ मजबूत
दिखा सकें। इनके लिए यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, राजनीतिक भविष्य की परीक्षा मानी जा रही है।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने अभियान के दौरान लगातार “विकास बनाम वंशवाद” के मुद्दे को उठाया। उन्होंने
जनता से अपील की कि बिहार को स्थिरता की जरूरत है, न कि प्रयोगवाद की राजनीति की। वहीं, दूसरे डिप्टी
सीएम विजय कुमार सिन्हा ने प्रशासनिक मजबूती और कानून व्यवस्था को केंद्र बिंदु बनाया।
जनता का मूड क्या कहता है?
ग्रामीण और शहरी इलाकों में अलग-अलग रुझान देखने को मिले हैं। ग्रामीण बिहार में अब भी जातीय समीकरण
बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में बिजली, सड़क, पानी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। युवा वर्ग
में इस बार उल्लेखनीय जागरूकता देखने को मिली है। कई पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं ने कहा कि वे
रोजगार और शिक्षा के आधार पर वोट कर रहे हैं, न कि जात या धर्म के आधार पर।
मत प्रतिशत और रुझान
पहले चरण में औसतन 58 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले चुनावों के लगभग बराबर है। महिला मतदाताओं की
भागीदारी ने सबका ध्यान खींचा। कई जगहों पर महिलाओं ने पुरूषों से ज्यादा मतदान किया, जो यह संकेत देता
है कि वे मुद्दों के प्रति पहले से अधिक सजग हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव किसी एक लहर पर नहीं, बल्कि स्थानीय समीकरण और प्रत्याशी की
छवि पर टिका हुआ है। ऐसे में परिणाम किसी भी दिशा में जा सकते हैं।
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Bihar Chunav 2025 का कौन बनेगा बादशाह?
अब जबकि EVM में सबकी किस्मत बंद हो चुकी है, तो यह कहना जल्दबाजी होगी कि कौन सत्ता का बादशाह
बनेगा। लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव में हर उम्मीदवार को जनता के सामने जवाबदेह होना पड़ा है। चाहे
वह वादों का सवाल हो या कार्यों का, हर पार्टी को अपनी विश्वसनीयता साबित करनी है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हैं कि अगर कोई स्पष्ट बहुमत नहीं आता है, तो जोड़-तोड़ की राजनीति एक बार फिर
केंद्र में आ सकती है। हालांकि, मतदाता अब पहले की तरह खामोश नहीं हैं—वे अपने मुद्दों और आकांक्षाओं के प्रति
सचेत हैं।पहले चरण ने यह साफ संकेत दे दिया है कि बिहार का मतदाता अब केवल नारों से प्रभावित नहीं होगा।
जो भी जनता की असली जरूरतों को समझेगा और उनके लिए काम करेगा, वही सत्ता के शिखर तक पहुंचेगा।
इंतजार अब केवल नतीजों का है—जिस दिन EVM के दरवाजे खुलेंगे, बिहार की अगली तस्वीर सामने होगी।