बिहार चुनाव 2025:1990 के दशक से बिहार की राजनीति में बाहुबली नेताओं का बोलबाला रहा है। पर अब उनके बेटे, पत्नियाँ या भाई मैदान में हैं—जैसे कि मोकामा के अनंत सिंह की गैरमौजूदगी में उनके परिवार के सदस्य या सारण के मंझी सीट से रंधीर सिंह (प्रभुनाथ सिंह के पुत्र), वैशाली, गोविंदगंज, आरा, सिवान, गया, अरवल जैसी सीटों पर बाहुबली परिवारों की पकड़ बरकरार है। इनमें से कई विधायक या नेता फिलहाल जेल में हैं या जमानत पर हैं, फिर भी उनकी राजनीतिक विरासत निर्विवाद दिख रही है।

बिहार चुनाव 2025:रिश्तेदारी से रणनीति
रिश्तेदारी की यह राजनीति न सिर्फ परिवार तक, बल्कि कुलों–जातियों और इलाके की वफादारियों को
भी शामिल करती है। बड़े बाहुबली नेतागण आपस में रिश्तेदार बन कर चुनाव अभियान को मजबूती दे
रहे हैं और नए गठजोड़ बना रहे हैं। जैसे, एक बाहुबली का बेटा विरोधी पार्टी से तो दूसरा किसी गठबंधन
से लड़ रहा है, जिससे मुकाबला—बाहुबली बनाम बाहुबली—सीधा हो गया है। कई सीटों पर पत्नियाँ
, बेटियाँ, भाई, या दामाद चुनाव मैदान में हैं जिससे चुनावी समीकरण लगातार गर्माए हैं।
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दलों की रणनीति और बाहुबली परिवार
- आरजेडी ने सबसे ज्यादा बाहुबली या उनके रिश्तेदारों को टिकट दिए हैं (9 उम्मीदवार)
- जेडीयू ने करीब 7, बीजेपी ने 4 और एलजेपी ने 2 बाहुबली या उनके रिश्तेदारों को टिकट दिया है
- कुल मिलाकर 22 से ज्यादा ऐसे उम्मीदवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बाहुबली पृष्ठभूमि वाले हैं
बाहुबली फैक्टर का असर
इन बाहुबली परिवारों के स्थानीय स्तर पर दबदबे और वोट बैंक के चलते, बड़े दल
अब भी ऐसे चेहरों पर भरोसा कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बाहुबली परिवारों के प्रति
डर और भरोसे का अजीब संतुलन है—नतीजा ये कि कई बार विवादित छवि के
बावजूद निर्वाचित हो जाते हैं। ज़्यादातर बाहुबली अब अपनी अगली पीढ़ी को
राजनीति में उतार रहे हैं ताकि परिवार की पकड़ और सॉफ्ट इमेज दोनों बनी रहे।
अपराध और राजनीति का समीकरण
ADRs की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के चुनाव में कुल उम्मीदवारों के 47% पर आपराधिक मुकदमे हैं, जिनमें 27% पर हत्या, रंगदारी, अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। बहस इस बात पर है कि क्या बिहार चुनावों में बाहुबल आधारित राजनीतिक संस्कृति कभी खत्म होगी या यही दबंग परिवार सत्ता में वापस लौटेंगे।
जाति, अपराध और रिश्तेदारी
राजनीति, जाति, अपराध और रिश्तेदारी बिहार की चुनावी राजनीति का अनोखा त्रिकोण बनाते हैं; बाहुबली परिवार इन्हीं के सहारे चुनावी जीत की रणनीति बनाते हैं। ‘जंगलराज’ बनाम ‘सुपर CM’ के चुनावी विमर्श में जब-जब बाहुबली परिवार का जिक्र आता है तो पुराने नाम नए चेहरे के साथ सामने आते हैं—और राजनीति की गर्मी कई गुना बढ़ जाती है।
निष्कर्ष
2025 का बिहार चुनाव बाहुबली बनाम बाहुबली और रिश्तेदारियों के द्वंद्व से राजनीतिक सुर्ख़ियों में है। परिवार, अपराध और राजनीति का गठजोड़ यहाँ की मूल सच्चाई है। बहस जारी है कि क्या अगली पीढ़ी बदलाव लाएगी या दबंग राजनीति का वही पुराना मॉडल ही सत्ता की चाबी बना रहेगा।