अरावली पर घमासान: राजस्थान की प्राचीन अरावली पहाड़ियों को लेकर राजनीतिक तूफान चल पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद जहाँ पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ी है, वहीं कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राजस्थान सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अरावली के संरक्षण से जुड़े फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है और बीजेपी सरकार पर पर्यावरण के नाम पर विकास के नाम पर अरावली को बर्बाद करने का आरोप लगाया है।

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अरावली के कुछ हिस्सों को खनन के लिए खोलने की अनुमति देने वाले राजस्थान सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाया। अदालत ने कुछ पहाड़ियों को खनन के लिए खोलने की अनुमति दी, जिसे पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों ने बड़ी चिंता की बात बताया। वे कहते हैं कि अरावली प्राकृतिक जल संचयन, वायु गुणवत्ता और जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके कटान से राज्य का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है।
सचिन पायलट का BJP सरकार पर तीखा हमला
इसी पृष्ठभूमि में सचिन पायलट ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार
अरावली को खनन और निर्माण के लिए बलि की बकरी बना रही है। उनका आरोप है कि सरकार बड़े उद्योगों
और निर्माण कंपनियों के दबाव में आकर पर्यावरण को नजरअंदाज कर रही है। पायलट ने कहा कि अरावली
सिर्फ पहाड़ियों का समूह नहीं, बल्कि राजस्थान की आत्मा हैऔर इसकी रक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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सचिन पायलट की सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की अपील
अरावली पर घमासान: पायलट ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और
अरावली के संवेदनशील क्षेत्रों को खनन से पूरी तरह सुरक्षित रखे। उन्होंने कहा कि विकास का नारा देकर
प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, अरावली के बिना राजस्थान का भविष्य
खतरे में है — भूजल स्तर गिरेगा, धूल भरी हवाएँ बढ़ेंगी और जैव विविधता को भारी नुकसान होगा।
अरावली मुद्दे पर कांग्रेस एकजुट
कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी पायलट के बयान का समर्थन किया है। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार ने
अरावली के नाम पर लगातार विवादास्पद फैसले लिए हैं और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी इसी दिशा में
देखा जा रहा है। वे मांग कर रहे हैं कि अरावली के सभी भागों को एक विशेष पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र के तौर पर
घोषित किया जाए और उस पर किसी भी तरह का खनन या बड़े निर्माण प्रोजेक्ट रोक दिए जाएं।
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इस मुद्दे पर अब जन आंदोलन की संभावना भी बढ़ रही है। पर्यावरण संगठन, स्थानीय ग्रामीण और युवा समूह
अरावली की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। वे चाहते हैं कि न तो सरकार और न ही न्यायपालिका अरावली
के नाम पर ऐसे फैसले ले जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा बन जाएं।
राजनीति से आगे पर्यावरण और भविष्य की जंग
अरावली पर घमासान: अरावली पर यह घमासान सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि राजस्थान के पर्यावरण,
जल संसाधन और भविष्य की लड़ाई है। अब यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मांग पर कैसे प्रतिक्रिया देता है
और राजस्थान सरकार अपनी नीति में कितना बदलाव लाती है।