संविधान दिवस 2025: हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस मनाया जाता है, जो हमारे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस है। यह दिन इसलिए खास है क्योंकि 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से स्वीकार किया था, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। वर्ष 2015 से इस दिन को संविधान दिवस के रूप में आधिकारिक रूप से मनाया जाना शुरू हुआ था, जो डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में था। यह दिवस संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भारत के लोकतांत्रिक जीवन को समझाने का अवसर है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका
डॉ. भीमराव अंबेडकर भारत के संविधान के मुख्य शिल्पकार और इसके प्रमुख निर्माता थे। उन्होंने
संविधान निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई और संविधान सभा के शुरुआती सदस्यों में शामिल रहे।
1947-48 में संविधान के ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष के रूप में, डॉ. अंबेडकर ने संविधान का प्रारूप
तैयार किया और विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सदस्यों के विचारों को एक कानूनी
दस्तावेज़ में संकलित किया। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता, और मानवाधिकारों को संविधान
के आधार स्तंभ बनाया, जो लंबे समय से चले आ रहे भेदभाव और असमानताओं के खिलाफ थे।
संविधान का महत्व
भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संवैधानिक दस्तावेज है। यह केवल एक कानूनी
दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति और समता की गारंटी है जिसने प्रत्येक नागरिक
को अधिकार और स्वतंत्रता प्रदान की। संविधान ने सभी भारतीयों को समानता, अभिव्यक्ति
की आज़ादी, धर्म की स्वतंत्रता, और न्याय जैसे मूलभूत अधिकार दिये। इसकी प्रस्तावना में
“न्याय, स्वतंत्रता, समानता, और बंधुत्व” के सिद्धांत इस बात का प्रतीक हैं कि भारत एक
समावेशी और लोकतांत्रिक राष्ट्र है। संविधान हमारी राष्ट्रीय एकता और विविधता का सूत्रधार है।
संविधान दिवस का आयोजन
संविधान दिवस के मौके पर देशभर में विभिन्न सरकारी, शैक्षणिक और सामाजिक संस्थान
संवैधानिकमूल्यों को समझाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करते हैं। 2025 में भी राष्ट्रीय स्तर
पर संसद भवनमें एक भव्यसमारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री,
उपराष्ट्रपति और अन्य महत्वपूर्ण गणमान्यव्यक्ति हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान संविधान
की प्रस्तावना का वाचन और राष्ट्रपति का अभिभाषण शामिलहोता है। साथ ही,
विभिन्नविभाग और राज्य सरकारें भी इस अवसर पर संवैधानिक जागरूकता अभियानों
का आयोजन करती हैं।
डॉ. अंबेडकर का सामाजिक न्याय के लिए योगदान
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने न केवल संविधान के कानूनी पहलुओं पर काम किया बल्कि
सामाजिक न्याय केलिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे दलित समाज के उद्धारक थे
और सामाजिक भेदभाव के खिलाफखड़ेरहे। उनका प्रयास था कि संविधान के माध्यम
से हर व्यक्ति को उसके अधिकार मिले और वहसामाजिकसमानता का हिस्सा बन सके।
उन्होंने आरक्षण, संबुभ्यता, और शिक्षा के अधिकारों कोसंविधान में शामिल कर समाज
के कमजोर वर्गों को सम्मान और अवसर दिलाए।इस प्रकार, संविधान दिवस न सिर्फ
भारत के एक संविधान को अपनाने का दिन है, बल्कि यह Dr. भीमरावअंबेडकर
जैसे महापुरुषों के योगदान को याद करने और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान
प्रकट करने काभी दिन है जो भारत के लोकतंत्र की मजबूत नींव हैं।