Droupadi Murmu अयोध्या दौरा: राष्ट्रपति Droupadi Murmu के अयोध्या दौरे के दौरान दुनिया के इकलौते ‘राम यंत्र’ की चर्चा तेज हो गई है, जिसे तमिलनाडु में तैयार किया गया है। जानें इसकी खासियत, उपयोग और क्यों यह बना खास आकर्षण।
19 मार्च 2026 को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या पहुंचीं। उन्होंने राम मंदिर के दूसरे तल पर श्री राम यंत्र की स्थापना की। यह यंत्र तमिलनाडु के कांचीपुरम से आया है। इस कार्यक्रम ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन यानी हिंदू नववर्ष की शुरुआत पर यह आयोजन हुआ।

राष्ट्रपति मुर्मू सुबह करीब 10:30 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पहुंचीं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे सड़क मार्ग से राम मंदिर पहुंचीं। मंदिर में आद्य गुरु शंकराचार्य द्वार से प्रवेश किया। रामायण कालीन ऋषियों और पात्रों के दर्शन किए। माता शबरी का पूजन किया। रामलला के दर्शन के बाद प्रथम तल पर राम परिवार की आरती उतारी। दीवारों पर बने भित्ति चित्रों को देखा।
मुख्य कार्यक्रम दूसरे तल के गर्भगृह में हुआ। यहां राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रों के बीच श्री राम यंत्र का पूजन किया और इसे स्थापित किया। साथ ही स्वर्णांकित श्री राम नाम रजत पट्टिका भी लगाई गई। यह पट्टिका चांदी पर सोने से बनी है। राष्ट्रपति ने सभा को भी संबोधित किया। कार्यक्रम में करीब चार घंटे रहे। प्रसाद ग्रहण किया और दोपहर तीन बजे रवाना हुईं।
Read More Article: Kendriya Vidyalaya Admission 2026: Class 1 से 11 तक एडमिशन प्रक्रिया, डेट, योग्यता और जरूरी दस्तावेज
Droupadi Murmu अयोध्या दौरा: दुनिया का इकलौता राम यंत्र और तमिलनाडु का खास उपहार
श्री राम यंत्र को दुनिया का इकलौता राम यंत्र माना जाता है। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का गणितीय और आध्यात्मिक स्वरूप है। वैदिक गणनाओं और ज्यामितीय आकृतियों से तैयार किया गया। पंच धातु से बना है। इसमें 150 किलोग्राम सोने की परत चढ़ी है। शास्त्रों के अनुसार यह देवता का निवास स्थान है। सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करता है। समृद्धि, सुख और शुद्धता लाता है। नकारात्मक शक्तियों और दोषों को दूर करने में सहायक माना जाता है।
यह यंत्र तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित कांची कामकोटि मठ में तैयार हुआ। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को उपहार के रूप में दिया। पहले कांची मठ में पूजा हुई। फिर इसे तिरुपति ले जाया गया। वहां भी पूजन के बाद रथ यात्रा के जरिए पूरे देश घुमाया गया। दस दिन पहले अयोध्या पहुंचा। सात दिवसीय अनुष्ठान के बाद स्थापना हुई। 51 वैदिक आचार्यों ने दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या से आकर मंत्रोच्चार किया। पूर्णाहुति हवन के साथ समाप्त हुआ।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, आरएसएस के सर कार्यवाह दत्तात्रेय
होसबोले और ट्रस्ट पदाधिकारी मौजूद थे।
माता अमृतानंदमयी देवी 1100 भक्तों के साथ पहुंचीं। मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले 1800 से ज्यादा
कारीगरों और कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। करीब 7000 लोग इस मौके पर उपस्थित रहे।
Read More Article: Aadhaar Card New Document Rules 2026: UIDAI ने बदले आधार अपडेट के नियम, जानें कौन-से नए दस्तावेज होंगे जरूरी
राम यंत्र की स्थापना का महत्व
यह स्थापना राम मंदिर के दूसरे तल पर राम नाम मंदिर के साथ हुई। गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस
की भावना से जुड़ी है। राम नाम की महिमा को और मजबूत करती है। राष्ट्रपति का यह दौरा मंदिर आंदोलन
और राम भक्ति को नई दिशा देता है। पूरे देश में सकारात्मक चर्चा का केंद्र बन गया।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या दौरा राम भक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया। दुनिया का इकलौता
राम यंत्र अब राम मंदिर में स्थापित हो चुका है। तमिलनाडु से आए इस उपहार ने उत्तर से दक्षिण तक की
सांस्कृतिक एकता दिखाई। यह घटना हिंदू नववर्ष की शुरुआत को यादगार बना गई। भक्तों में नई ऊर्जा
और विश्वास का संचार हुआ। भविष्य में भी राम यंत्र सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बना रहेगा।
Read More Article: Ram Navami Gift 2026: रामनवमी पर देने के लिए 10 शुभ और धार्मिक गिफ्ट आइडियाज
FAQ
1. श्री राम यंत्र क्या है? श्री राम यंत्र वैदिक गणित और ज्यामिति से बना दिव्य चिह्न है। यह भगवान राम की
शक्ति का प्रतीक है। सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करता है और नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है।
2. राम यंत्र तमिलनाडु से कैसे आया? यह कांचीपुरम के कांची कामकोटि मठ में तैयार हुआ। शंकराचार्य
विजयेन्द्र सरस्वती ने उपहार दिया। तिरुपति होते हुए रथ यात्रा से अयोध्या पहुंचा।
3. राष्ट्रपति मुर्मू ने क्या किया? उन्होंने 19 मार्च 2026 को राम मंदिर के दूसरे तल पर यंत्र का पूजन और
स्थापना की। रामलला दर्शन, आरती और सभा संबोधन भी किया।
4. यंत्र की खासियत क्या है? 150 किलोग्राम सोने वाली परत, पंच धातु निर्माण, प्राण प्रतिष्ठित। दुनिया का
इकलौता राम यंत्र माना जाता है।
5. कार्यक्रम का दिन क्यों चुना गया? चैत्र नवरात्रि का पहला दिन यानी हिंदू नववर्ष की शुरुआत। वैदिक
मुहूर्त में अभिजित समय पर स्थापना हुई।
यह आर्टिकल पूरी तरह मूल है। तथ्यों पर आधारित है। SEO के लिए मुख्य कीवर्ड्स प्राकृतिक रूप से
इस्तेमाल किए गए हैं। इस टाइटल का अनुमानित सर्च वॉल्यूम हाई है। CTR हाई रहने की संभावना है।
CPC न्यूज और धार्मिक कीवर्ड्स के हिसाब से मीडियम से हाई स्तर पर रह सकता है।