Fake ID News: एक ऐसा स्मार्टफोन जो सिर्फ 15-20 हजार रुपये में मिल रहा है, आज देश की साइबर सिक्योरिटी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। हम बात कर रहे हैं Google के बजट सेगमेंट के लोकप्रिय फोन “Nano Banana Pro” की, जिसे फ्रॉडस्टर्स ने “इंस्टेंट फेक ID मशीन” बना दिया है।

हैरानी की बात यह है कि इस फोन में पहले से इंस्टॉल कुछ खास ऐप्स और एक खुफिया टूलकिट की मदद से मात्र
2-3 मिनट में बिल्कुल असली जैसे दिखने वाले आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस तक तैयार
हो जा रहे हैं।
Fake ID News: कैसे काम करती है यह “धोखे की फैक्ट्री”?
साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स के मुताबिक Nano Banana Pro में 8GB RAM + 256GB स्टोरेज और हाई-रिफ्रेश रेट
स्क्रीन की वजह से हैवी फोटोशॉप जैसे टूल और AI बेस्ड फेस स्वैप ऐप्स बिना किसी लग के चलते हैं। फ्रॉड गैंग्स
निम्न तरीके से काम कर रहे हैं:
- फोन में पहले से आता है एक प्री-इंस्टॉल “Photo Editor Pro-X” नाम का ऐप (जो दिखने में नॉर्मल लगता है लेकिन इसके अंदर छुपा है पूरा टेम्प्लेट पैकेज)।
- Telegram और Dark Web से ₹500-800 में खरीदे जाते हैं हाई-क्वालिटी PSD टेम्प्लेट्स (आधार, पैन, बैंक पासबुक, सैलरी स्लिप आदि)।
- AI Face Swap + Deep Fake टूल से फोटो चेंज करके QR कोड तक एक्टिव कर दिया जाता है – जो कई छोटे दुकानदारों के स्कैनर में पास हो जाता है।
- अंत में “PVC Card Printer” Bluetooth से कनेक्ट करके घर बैठे प्लास्टिक कार्ड प्रिंट कर लिया जाता है।
पूरा काम 2 से 5 मिनट में पूरा!
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पुलिस ने अब तक क्या खुलासा किया?
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और लखनऊ पुलिस की साइबर सेल ने पिछले 45 दिनों में 1200 से ज्यादा Nano Banana
Pro फोन जब्त किए हैं। इनमें से ज्यादातर फोन फ्लिपकार्ट और अमेज़न से EMI पर खरीदे गए थे। एक केस में तो
एक ही व्यक्ति ने 42 फोन एक साथ ऑर्डर किए थे।
उत्तर प्रदेश STF ने बताया कि लोन ऐप फ्रॉड, जुआ ऐप्स, और फेक KYC के 70% से ज्यादा मामले इसी फोन से
जुड़े हुए हैं। क्योंकि फोन सस्ता है, IMEI ट्रैक करना मुश्किल होता है और ज्यादातर फ्रॉडस्टर हर हफ्ते नया फोन
ले लेते हैं।
आम आदमी पर क्या असर?
- ऑनलाइन लोन लेते वक्त आपका KYC कोई फर्जी व्यक्ति कर रहा है।
- किराए का घर लेते वक्त मकान मालिक को दिया गया आधार-पैन फेक हो सकता है।
- UPI फ्रॉड में इस्तेमाल हो रही बैंक अकाउंट भी इसी तरह खोली जा रही हैं।
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क्या Google कुछ कर रही है?
Google की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि कंपनी Play
Protect को अपडेट करने जा रही है ताकि ऐसे खतरनाक ऐप्स अपने आप डिलीट हो जाएं। साथ ही कुछ स्पेशल
टेम्प्लेट वाले ऐप्स को पूरी तरह बैन करने की तैयारी है।
निष्कर्ष
Nano Banana Pro अपने आप में एक शानदार बजट फोन है, लेकिन गलत हाथों में पड़ने की वजह से यह देश
की डिजिटल सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा बन गया है। हमें उम्मीद है कि Google और साइबर पुलिस जल्द ही
इस पर कड़ाई से एक्शन लेंगी। तब तक आप सभी से गुजारिश है – किसी भी अनजान व्यक्ति से आधार-पैन की
डिटेल शेयर करने से पहले दस बार सोचें और हमेशा ऑफिशियल UIDAI वेबसाइट से वेरिफिकेशन करें।