Gorakhpur jail program: गोरखपुर जिला कारागार में आज 19 दिसंबर 2025 को अमर शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के 98वें बलिदान दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह वह ऐतिहासिक स्थल है जहां 19 दिसंबर 1927 को काकोरी कांड के महानायक बिस्मिल को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी दी थी।

कार्यक्रम में कैदियों, जेल प्रशासन और बाहर से आए लोगों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया।
Gorakhpur jail program: गोरखपुर जिला कारागार में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के 98वें बलिदान दिवस पर भव्य आयोजन
जिला कारागार में बिस्मिल स्मारक और उनकी बैरक के पास मुख्य आयोजन हुआ। सुबह से ही श्रद्धांजलि सभा शुरू हुई,
जहां जेल अधीक्षक और अन्य अधिकारियों ने बिस्मिल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
कैदियों ने देशभक्ति गीत गाए, जैसे “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” जो बिस्मिल की ही रचना है। कुछ कैदियों
ने बिस्मिल की कविताओं का पाठ किया और उनके जीवन पर छोटे-छोटे नाटक प्रस्तुत किए।
जेल प्रशासन ने बताया कि यह कार्यक्रम कैदियों में देशप्रेम की भावना जगाने के लिए हर साल आयोजित किया जाता है।
इस बार विशेष रूप से बिस्मिल की कोठरी और फांसी घर को सजाया गया था।
बाहर से कुछ सामाजिक संस्थाओं के सदस्य भी पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरा वातावरण ऐसा था मानो बिस्मिल
की शहादत आज भी जीवंत हो उठी हो।
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बिस्मिल और गोरखपुर का अटूट रिश्ता
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म शाहजहांपुर में हुआ था, लेकिन उनकी शहादत गोरखपुर से जुड़ी है। काकोरी ट्रेन एक्शन
के बाद गिरफ्तारी के बाद उन्हें गोरखपुर जेल लाया गया, जहां उन्होंने अपने अंतिम दिन बिताए।
जेल की दीवारों पर उन्होंने कई शेर उकेरे, जो आज भी वहां मौजूद हैं। फांसी से पहले उन्होंने वेद मंत्रों का जाप किया और
“भारत माता की जय” के नारे लगाए। उनकी शहादत ने पूरे देश में क्रांति की लहर दौड़ा दी थी।
गोरखपुर जेल में बिस्मिल स्मृति उपवन और स्मारक बना हुआ है, जो उनकी याद को जीवित रखता है। मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ की पहल पर इस स्थल को आमजन के लिए खोला गया है, ताकि युवा पीढ़ी उनके बलिदान से प्रेरणा ले सके।
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कार्यक्रम का उद्देश्य
इस आयोजन से कैदियों को सुधार की दिशा में प्रेरित करना मुख्य मकसद है। जेल प्रशासन का मानना है कि बिस्मिल
जैसे क्रांतिकारियों की कहानियां सुनकर कैदी अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा पाते हैं। साथ ही, यह दिन पूरे शहर के
लिए देशभक्ति का पर्व बन जाता है।
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निष्कर्ष
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा है। गोरखपुर जिला कारागार में आज का
कार्यक्रम न केवल उनकी याद को ताजा करता है, बल्कि नई पीढ़ी को देशसेवा का संदेश देता है।
उनकी शहादत बताती है कि आजादी कितनी कीमती है और इसे बनाए रखने के लिए हमें एकजुट रहना होगा। ऐसे आयोजन
हमें याद दिलाते हैं कि क्रांतिकारियों के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी हमारी है। बिस्मिल अमर रहें!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी कब और कहां दी गई?
19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जिला कारागार में।
2. इस साल बलिदान दिवस पर क्या विशेष हुआ?
देशभक्ति गीत, कविता पाठ और कैदियों द्वारा प्रस्तुति। पूरा परिसर देशभक्ति से गूंजा।
3. बिस्मिल की प्रसिद्ध रचना कौन सी है?
“सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है”।
4. काकोरी कांड क्या था?
1925 में क्रांतिकारियों ने ट्रेन से सरकारी खजाना लूटा था, जिसके लिए बिस्मिल को सजा मिली।
5. गोरखपुर जेल में बिस्मिल से जुड़ी क्या खास चीजें हैं?
उनकी कोठरी, फांसी घर, दीवारों पर उकेरे शेर और स्मारक।
6. यह कार्यक्रम क्यों आयोजित किया जाता है?
कैदियों में देशप्रेम जगाने और युवाओं को प्रेरित करने के लिए।