जम्मू-कश्मीर फिर सुलगा: जम्मू-कश्मीर का किश्तवाड़ जिला एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। यहां छात्रू इलाके
में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच ताजा एनकाउंटर ने माहौल को गर्मा दिया है। हालिया घटना ने न सिर्फ
क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि घाटी में आतंकवाद की वापसी को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है.

जम्मू-कश्मीर फिर सुलगा:एनकाउंटर की शुरुआत
05 नवंबर 2025 की सुबह, किश्तवाड़ के छात्रू इलाके से इनपुट मिला कि कुछ आतंकी जंगलों में छिपे
हुए हैं। सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया और
पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग
शुरू कर दी, जिसके जवाब में जवानों ने भी मोर्चा संभाला। एनकाउंटर अभी भी जारी है, इस दौरान
एक सेना का जवान घायल हो गया है.
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सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति
सेना और पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेर कर नाकेबंदी कर दी है ताकि कोई आतंकी फरार न हो सके।
अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है और नागरिकों को सुरक्षा के लिए इलाके से दूर रहने की
सलाह दी गई है। सूत्रों के मुताबिक दो से तीन आतंकी पहाड़ी क्षेत्र में छिपे हुए हैं, जो बीते कुछ
महीनों में क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों में सक्रिय थे.
किश्तवाड़ में आतंकवाद की वापसी
किश्तवाड़ और आस-पास के पहाड़ी इलाकों में बीते छह महीने में कुल छह एनकाउंटर हो चुके हैं।
हर बार आतंकी इलाके की दुर्गमता और जंगलों का फायदा उठाकर बच निकलते रहे हैं। लेकिन
सुरक्षाबलों का सतत अभियान क्षेत्र में अमन-चैन बहाल रखने की कोशिश जारी रखे हुए है. सितंबर में
इसी इलाके में हुई मुठभेड़ में दो सैनिकों ने शहादत दी थी, वहीं कुछ अन्य ऑपरेशन में आतंकी मारे भी गए.
आतंकियों की तलाश और चुनौतियाँ
सुरक्षाबलों को जंगल में आतंकियों के छिपने के कई ठिकाने बरामद हुए हैं। सेना और पुलिस की टीम
लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। दुर्गम इलाके, घने जंगल और पहाड़ सुरक्षा एजेंसियों की सबसे
बड़ी चुनौती बने हुए हैं। स्थानीय लोग भी खौफ और अनिश्चितता में जी रहे हैं.
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आम जनता पर असर
एनकाउंटर के चलते स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को घरों में रहने की सलाह दी है। स्कूल-कॉलेज बंद
कर दिए गए हैं और आम जन जीवन प्रभावित हुआ है। आतंकी गतिविधियों का डर लोगों की रोजमर्रा
की जिंदगी में तनाव ले आया है.
निष्कर्ष
किश्तवाड़ का एनकाउंटर सिर्फ एक सुरक्षा घटना नहीं, बल्कि घाटी में आतंकवाद के बदलते चेहरे
का संकेत है। सुरक्षाबलों की सतर्कता और ग्रामीण क्षेत्रों में आतंकियों की बढ़ती मौजूदगी दोनों
मिलकर एक नया संकट उत्पन्न कर रहे हैं। हालांकि, सेना और पुलिस के हाथों कई बार आतंकियों
को मुंहतोड़ जवाब मिला है, लेकिन आतंकवाद पूरी तरह खत्म ना होना इलाका और देश के लिए