झारखंड शॉकिंग न्यूज़: फरक्का एक्सप्रेस से पकड़ी गई 662 से ज्यादा प्रतिबंधित कछुओं की खेप

झारखंड शॉकिंग न्यूज़: झारखंड में रेलवे पुलिस ने एक बड़ा खुलासा किया है, जहां फरक्का एक्सप्रेस ट्रेन से 662 से अधिक प्रतिबंधित कछुओं की तस्करी की खेप पकड़ी गई। यह घटना वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क को झकझोर देने वाली है, जो लुप्तप्राय प्रजातियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने का धंधा चला रहे थे। ट्रेन हावड़ा से नई दिल्ली जा रही थी, और जांच में चाईबासा स्टेशन पर यह कार्रवाई हुई।

झारखंड शॉकिंग न्यूज़: तस्करी का भंडाफोड़ कैसे हुआ

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) को गुप्त सूचना मिली थी कि ट्रेन के S-7 कोच में संदिग्ध सामान है। चाईबासा रेलवे स्टेशन पर छापेमारी में दो तस्कर गिरफ्तार हुए, जिनके बैगों से प्लास्टिक डिब्बों में भरे कछुए बरामद हुए। कुल 662 कछुए थे, जिनमें इंडियन स्टार टॉइस और ब्लैक-स्पॉटेड टर्टल जैसी संरक्षित प्रजातियां शामिल हैं। ये कछुए अवैध रूप से बंगाल की नदियों से पकड़े गए थे, जहां वे खतरे में हैं। तस्करों ने इन्हें चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया भेजने की योजना बनाई थी, जहां इनकी कीमत लाखों में है।

कछुओं की हालत खराब थी—कई निर्जलित और घायल। वन विभाग ने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया, और अब इन्हें वन्यजीव रिहैब सेंटर भेजा जा रहा है। जीआरएफ एक्ट के तहत ये कछुए शेड्यूल-1 में हैं, यानी इन्हें रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

वन्यजीव तस्करी का काला कारोबार

झारखंड और बिहार वन्यजीव तस्करी का हॉटस्पॉट बन चुके हैं। फरक्का एक्सप्रेस जैसे ट्रेनें तस्करों की पहली पसंद हैं, क्योंकि चेकिंग कम होती है। पिछले साल भी इसी ट्रेन से सैकड़ों कछुए पकड़े गए थे। चीन में इनकी मांग दवाओं, पेट्स और खाने के लिए है। एक कछुए की कीमत 5-10 हजार रुपये तक हो जाती है। यह कारोबार सालाना करोड़ों का है, जो आतंकवाद तक फंड करता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन और अतिक्रमण से कछुओं की संख्या घट रही है।

स्थानीय मछुआरे और गिरोह इसमें लिप्त हैं। पुलिस ने तस्करों के मोबाइल से अंतरराष्ट्रीय कॉन्टैक्ट्स बरामद किए, जांच तेज।

प्रशासन की कार्रवाई और चुनौतियां

RPF और वन विभाग ने संयुक्त जांच शुरू की। गिरफ्तार तस्करों को न्यायालय में पेश किया गया,

सख्त सजा की उम्मीद। झारखंड सरकार ने ट्रेनों में वन्यजीव चेकिंग बढ़ाने के आदेश दिए।

एनजीटी ने भी ऐसे मामलों पर सख्ती बरतने को कहा। लेकिन चुनौतियां बरकरार—सीमावर्ती इलाके, भ्रष्टाचार और जागरूकता की कमी।

सोशल मीडिया पर #SaveTurtles ट्रेंड कर रहा, जहां लोग सरकार से अपील कर रहे।

वन्यजीव प्रेमी संगठन CZA ने बयान जारी किया।

सबक और भविष्य की राह

यह घटना वन्यजीव संरक्षण की जरूरत बताती है। रेलवे को सेंसर और डॉग स्क्वॉड लगाने चाहिए।

जनता को रिपोर्टिंग हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें। स्कूलों में जागरूकता अभियान चलें। लंबे समय में,

नदियों को साफ रखें और तस्करी पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाएं। कछुए जैव विविधता के महत्वपूर्ण हिस्से हैं—

उनके बिना पारिस्थितिकी चक्र बिगड़ जाएगा।

Leave a Comment

WhatsApp Join Whatsapp Group