हिंदू इलाकों का हाल: बांग्लादेश के हिंदू बहुल इलाकों में हालात चिंताजनक हैं, जहां मंदिरों पर हमले, घरों में आगजनी और हिंसा की घटनाएं आम हो चुकी हैं। 2025 में ये इलाके डर और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं, खासकर रंगपुर, सिलहट और चटगांव जैसे क्षेत्रों में।

हिंदू इलाकों का हाल: हिंसा की ताजा लहर
पिछले एक साल में हिंदू इलाकों पर 2,000 से ज्यादा हमले दर्ज हुए हैं, जिनमें 23 हत्याएं, 152 मंदिरों पर आक्रमण और सैकड़ों घर-दुकानों की लूट शामिल है। जनवरी 2025 में रंगपुर के एक हिंदू बहुल इलाके में पैगंबर के खिलाफ कथित पोस्ट पर 22 में से कई परिवारों के घर जला दिए गए; लोग भागकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचे। भारत सरकार ने भी 26 नवंबर 2024 से जनवरी 2025 तक 76 घटनाओं का हवाला देकर बांग्लादेश को चेतावनी दी।
प्रमुख प्रभावित इलाके
हिंदू आबादी वाले क्षेत्रों में स्थिति बदतर है:
- रंगपुर और सिलहट: यहां मूर्ति तोड़फोड़, बलात्कार और जमीन कब्जे की 258 घटनाएं जनवरी-जून 2025 में हुईं। महिलाएं चूड़ियां-बिंदी छुपाने लगीं।
- चटगांव-खुलना: कट्टरपंथी हमलों में 11 हत्याएं और 25 मंदिर क्षतिग्रस्त; स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता से भय बढ़ा।
- बारिसाल: ईशनिंदा के आरोप पर लिंचिंग; हिंदू परिवार रातों को जागते बिताते हैं।
ये इलाके अब खाली हो रहे हैं, क्योंकि हजारों हिंदू भारत की ओर पलायन कर चुके हैं।
सरकार और समाज की प्रतिक्रिया
अंतरिम सरकार पर निष्क्रियता का आरोप है; BHBCOP ने 2,244 घटनाओं का आंकड़ा दिया,
लेकिन कार्रवाई कम हुई। भारत ने MEA के जरिए विरोध दर्ज कराया और वीजा सेवाएं सीमित कीं।
स्थानीय स्तर पर कुछ मुस्लिम पड़ोसी मदद करते हैं, लेकिन जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों का प्रभाव बढ़ा है।
ग्रामीण हिंदू इलाकों की सच्चाई
ग्रामीण हिंदू गांवों में रातें खौफनाक हैं—मंदिरों पर पथराव, दुकानों पर लूट। USCIRF रिपोर्ट में कहा गया कि
सुरक्षा बल चुप रहते हैं। एक ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय हिंदू ने बताया, “हम घरों के दरवाजे बंद करके सोते हैं,
लेकिन डर कम नहीं होता।” शहरों जैसे ढाका में स्थिति थोड़ी बेहतर, लेकिन इलाकाई तनाव सीमा पार कर रहा।
भारत पर असर और भविष्य
ये घटनाएं भारत की सीमा सुरक्षा को चुनौती दे रही हैं—2025 में 1,100 घुसपैठ रोकी गईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ISI का हाथ हो सकता है। हिंदू समुदाय को मजबूत कानून,
अंतरराष्ट्रीय दबाव और समुदाय-आधारित सुरक्षा चाहिए। बिना ठोस कदमों के ये इलाके और खाली हो सकते हैं।