भारतीय आसमान में संकट: भारतीय एविएशन सेक्टर पिछले दो साल से अभूतपूर्व तेजी से बढ़ रहा है। यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर है, नए रूट खुल रहे हैं और एयरलाइंस बेड़े में विमान जोड़ने की होड़ में जुटी हैं। लेकिन इस तेज विकास के बीच एक गंभीर संकट सामने आ खड़ा हुआ है – क्वालिफाइड पायलटों की भारी कमी। इस कमी को पूरा करने के लिए देश की दो सबसे बड़ी एयरलाइंस – इंडिगो और एयर इंडिया – के बीच अब खुली जंग छिड़ गई है।

भारतीय आसमान में संकट: पायलटों की भूख कितनी बड़ी?
वर्तमान में भारत में लगभग 6,500–7,000 कमर्शियल पायलट सक्रिय हैं। लेकिन इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक अगले 5 साल में 2,500–3,000 अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी। कारण साफ हैं:
- इंडिगो ने 2025–2030 के बीच 500+ नए एयरक्राफ्ट (A320neo और A321neo) लेने का ऑर्डर दिया है।
- एयर इंडिया ने 470 विमानों (एयरबस और बोइंग दोनों) का मेगा ऑर्डर दिया है।
- अकासा, स्पाइसजेट, विस्तारा (अब एयर इंडिया का हिस्सा) और अन्य छोटी एयरलाइंस भी बेड़ा बढ़ा रही हैं।
- अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भारतीय पायलटों की मांग भी बढ़ रही है।
इतनी बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कप्तान (Type-rated Captains) और फर्स्ट ऑफिसर उपलब्ध ही नहीं हैं। नतीजा? पायलटों की सैलरी और बेनिफिट्स में भारी उछाल।
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इंडिगो बनाम एयर इंडिया: कौन आगे?
इंडिगो अभी भी भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है और पायलटों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसके फायदे:
- ज्यादा उड़ानें → ज्यादा फ्लाइंग ऑवर्स → जल्दी कैप्टन बनने का मौका
- बेहतर रोस्टर और छुट्टियां
- समय पर सैलरी
- स्टेबल नेटवर्क
लेकिन हाल के महीनों में इंडिगो ने पायलटों की बढ़ती मांग के चलते ऑफर में कटौती की है, जिससे कई सीनियर पायलट नाराज हुए।
दूसरी ओर एयर इंडिया (टाटा ग्रुप के अधिग्रहण के बाद) ने आक्रामक रणनीति अपनाई है। कंपनी ने पिछले 12 महीनों में 400+ पायलटों की भर्ती की है। एयर इंडिया के प्रमुख ऑफर:
- कैप्टन के लिए शुरुआती सैलरी: 3.5–4.5 लाख रुपये प्रति माह (इंडिगो से 20–40% ज्यादा)
- जॉइनिंग बोनस: 25–40 लाख रुपये (कुछ मामलों में 50 लाख तक)
- फास्ट-ट्रैक कमांड: अनुभवी फर्स्ट ऑफिसर को 12–18 महीने में कैप्टन बनने का मौका
- इंटरनेशनल फ्लाइंग का ज्यादा अनुपात (लंबी दूरी की उड़ानें ज्यादा पैसे देती हैं)
- प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी, मेडिकल में सुधार
- विदेशी पायलटों (Expat) को भी बड़े पैकेज देकर भारतीय पायलटों पर दबाव
पायलटों का पलायन और इसका असर
पिछले 6 महीनों में इंडिगो से एयर इंडिया में 150+ पायलट स्विच कर चुके हैं। कई पायलट इंडिगो के साथ बातचीत कर रहे हैं कि अगर बेहतर पैकेज नहीं मिला तो वे भी जाने को तैयार हैं। इस पलायन से इंडिगो को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है क्योंकि उनकी सबसे ज्यादा उड़ानें डोमेस्टिक हैं और पायलटों को जल्दी कमांड मिल जाती है, लेकिन सैलरी में अंतर अब बहुत बड़ा हो गया है।
यात्रियों पर क्या असर?
पायलटों की कमी के चलते पहले से ही कई एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द कीं या टाइमिंग बदली। अगर यह संकट और गहराया तो:
- टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं
- उड़ानें कम हो सकती हैं, खासकर छोटे शहरों के लिए
- फ्लाइट डिले और कैंसिलेशन बढ़ सकते हैं
आगे क्या?
एविएशन इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि यह होड़ अगले 18–24 महीने तक चलेगी। इसके बाद स्थिति संभल सकती है जब:
- नए कैडेट पायलट ट्रेनिंग पूरी करके मार्केट में आएंगे
- कुछ विदेशी एयरलाइंस में भारतीय पायलटों की मांग कम होगी
- सरकार DGCA के साथ मिलकर ट्रेनिंग कैपेसिटी बढ़ाएगी
लेकिन फिलहाल भारतीय आसमान में पायलट भर्ती की जंग अपने चरम पर है। इंडिगो और एयर इंडिया दोनों ही जानते हैं कि जो पायलटों को बेहतर डील देगा, वही अगले 3–4 साल तक ज्यादा उड़ानें भर पाएगा।
यह जंग सिर्फ दो कंपनियों की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर की है।
सवाल यह है – क्या पैकेज की होड़ से पायलटों का ध्यान सुरक्षित उड़ान की बजाय
सैलरी पर ज्यादा केंद्रित हो जाएगा? जवाब आने में अभी वक्त है।