बांग्लादेश हिंसा की आग: बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता ने हिंसक रूप ले लिया है। प्रसिद्ध पत्रकार उस्मान हादी की हत्या के बाद पूरे देश में आगजनी और विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। ढाका में मीडिया दफ्तरों पर हमले हुए, जिसमें ‘प्रथम আলো’ अखबार का दफ्तर जल गया और उसका संस्करण प्रकाशित नहीं हो सका। यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है, जिससे हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। [conversation_history]

बांग्लादेश हिंसा की आग: उस्मान हादी की हत्या का विवरण
उस्मान हादी बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार थे, जो भ्रष्टाचार और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक रिपोर्टिंग के लिए मशहूर थे। ढाका की सड़कों पर हमलावरों ने उन पर चाकू से हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिवार और सहयोगियों के अनुसार, यह हत्या उनकी हालिया रिपोर्ट्स से जुड़ी लगती है, जिसमें सत्ताधारी दलों पर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन विपक्ष ने इसे राज्य प्रायोजित बताया। सोशल मीडिया पर #JusticeForUsman ट्रेंड कर रहा है।
हादसे के बाद भड़की हिंसा ने ढाका को युद्ध क्षेत्र बना दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवनों पर पथराव किया, पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लिया। कम से कम 10 लोग घायल हुए।
मीडिया दफ्तरों पर हमले
हिंसा का शिकार सबसे ज्यादा मीडिया बना। ‘प्रথम আলो’, बांग्लादेश का सबसे बड़ा बंगाली दैनिक, इसका दफ्तर आग के हवाले कर दिया गया। दंगाइयों ने प्रिंटिंग प्रेस तोड़ दिया, जिससे आज का संस्करण नहीं छप सका। संपादक ने कहा, “यह हमला सच्चाई पर है।” अन्य चैनलों जैसे ‘दি डेली स्टार’ पर भी हमले हुए। पत्रकार संगठनों ने हड़ताल का ऐलान किया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया वॉचडॉग्स ने निंदा की, इसे प्रेस फ्रीडम पर खतरा बताया।
सरकार ने इंटरनेट कटौती और कर्फ्यू लगाने की योजना बनाई, लेकिन विपक्ष ने इसे दमन कहा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और हिंसा के कारण
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के खिलाफ लंबे समय से विरोध चल रहा है।
क्वोटा सुधार आंदोलन से शुरू हुई आग अब राजनीतिक हो गई। उस्मान हादी की हत्या
ने इसे भड़का दिया। विपक्षी दल बीएनपी ने सरकार को जिम्मेदार ठहराया। आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी ने जनता को उकसाया। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्र आगे हैं, जो लोकतंत्र की मांग कर रहे।
पिछले महीनों में दर्जनों पत्रकारों पर हमले हुए। यह ट्रेंड चिंताजनक है।
प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया
हिंसा से दुकानें जलीं, ट्रैफिक ठप, स्कूल बंद। अर्थव्यवस्था को झटका लगा। पड़ोसी देश भारत ने चिंता जताई,
सीमा सुरक्षा बढ़ाई। संयुक्त राष्ट्र ने शांति की अपील की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल,
जिसमें जलते दफ्तर दिख रहे। युवा पीढ़ी डर रही, लेकिन आवाज बुलंद कर रही।
सरकार ने जांच आयोग गठित किया, लेकिन भरोसा कम। विपक्ष चुनाव की मांग कर रहा।
आगे की राह और सबक
यह संकट बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए परीक्षा है। मीडिया सुरक्षा कानून सख्त होने चाहिए।
राजनीतिक संवाद जरूरी। अंतरराष्ट्रीय मदद से शांति प्रक्रिया शुरू हो। पत्रकारों को संरक्षण मिले,
ताकि सच्चाई सामने आए। हिंसा से कुछ नहीं मिलेगा, सिर्फ तबाही। उम्मीद है जल्द शांति लौटेगी।