आंबेडकर परिनिर्वाण दिवस पर सीएम योगी का बड़ा ऐलान, बाबा साहब की हर मूर्ति के चारों ओर बनेगी बाउंड्री वॉल

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आंबेडकर परिनिर्वाण दिवस: डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। 6 दिसंबर 2025 को लखनऊ में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में बाबा साहब की सभी प्रतिमाओं के चारों ओर सुरक्षा बाउंड्री वॉल बनाई जाएगी।

आंबेडकर परिनिर्वाण दिवस
आंबेडकर परिनिर्वाण दिवस पर सीएम योगी का बड़ा ऐलान, बाबा साहब की हर मूर्ति के चारों ओर बनेगी बाउंड्री वॉल

यह कदम आंबेडकर की विरासत की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है, जहां कई जगहों पर शरारती तत्वों द्वारा मूर्तियों

के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आई हैं।

आइए, इस घोषणा के पीछे की पूरी कहानी और इसके प्रभाव को विस्तार से जानते हैं।

आंबेडकर परिनिर्वाण दिवस का महत्व और योगी सरकार का श्रद्धांजलि कार्यक्रम

हर साल 6 दिसंबर को भारत डॉ. आंबेडकर के महापरिनिर्वाण को याद करता है, जिन्होंने भारतीय संविधान का निर्माण

किया और दलितों व वंचितों के अधिकारों के लिए जीवन समर्पित किया।

इस वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के आंबेडकर स्मारक में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। सीएम योगी

ने बाबा साहब के अस्थिकलश पर पुष्पांजलि अर्पित की और बुद्ध वंदना के साथ सभा की शुरुआत हुई। इस अवसर पर

उन्होंने न सिर्फ आंबेडकर के योगदान को याद किया, बल्कि उनकी स्मृतियों को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदमों का

ऐलान किया।

कार्यक्रम में विधायक, मंत्री और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। योगी ने कहा कि आंबेडकर संविधान निर्माता के रूप में

अमर हैं, और उनकी विचारधारा आज भी समाज को दिशा दे रही है।

लेकिन हाल के वर्षों में कुछ घटनाओं ने उनकी मूर्तियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, जिसके जवाब में यह नई नीति लाई

जा रही है।

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घोषणा की मुख्य बातें: बाउंड्री वॉल और कैनोपी की व्यवस्था

सीएम योगी की घोषणा के अनुसार, यूपी के हर जिले में लगी डॉ. आंबेडकर की प्रतिमाओं के आसपास मजबूत बाउंड्री

वॉल का निर्माण होगा।

जहां मूर्तियों पर छत की कमी है, वहां कैनोपी लगाई जाएगी ताकि मौसम की मार से बचाव हो सके। यह फैसला आंबेडकर

महापरिनिर्वाण दिवस 2025 पर लिया गया, जो राज्य सरकार की नई नीति का हिस्सा है।

सरकार का कहना है कि इससे न केवल विनाशकारी तत्वों पर अंकुश लगेगा, बल्कि मूर्तियों का रखरखाव भी आसान हो

जाएगा। अनुमान है कि इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे, और निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सामाजिक सद्भाव को मजबूत करेगा, क्योंकि आंबेडकर की मूर्तियां दलित समुदाय के

लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं।

पिछले कुछ महीनों में यूपी के विभिन्न हिस्सों में मूर्ति तोड़ने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही

का आरोप लगाया था। अब यह घोषणा उन आलोचनाओं का सीधा जवाब लगती है।

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सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं: समर्थन और बहस

सोशल मीडिया पर इस घोषणा को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई यूजर्स ने इसे सराहा, कहते हुए कि यह

आंबेडकर के सम्मान में सही दिशा है।

एक पोस्ट में लिखा गया, “योगी सरकार ने बाबा साहब की विरासत को सुरक्षित करने का संकल्प लिया है।” वहीं, कुछ

ने सवाल उठाए कि क्या यह सिर्फ चुनावी स्टंट है या वास्तविक कार्रवाई होगी।

इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वीडियो शेयर हो रहे हैं, जहां सीएम का भाषण वायरल हो गया है। हैशटैग जैसे

#AmbedkarParinirvanDiwas2025 और #YogiAmbedkarAnnouncement ट्रेंड कर रहे हैं। विपक्षी नेता

मायावती ने भी इस दिन एक रैली रद्द की, जो संयोग से चर्चा में आ गया।

आंबेडकर विरासत की सुरक्षा: व्यापक संदर्भ

यह घोषणा सिर्फ मूर्तियों तक सीमित नहीं है। योगी सरकार पहले भी आंबेडकर से जुड़े स्थलों का विकास कर चुकी है,

जैसे लखनऊ स्मारक का विस्तार। यूनेस्को में आंबेडकर की मूर्ति लगने पर भी सीएम ने बधाई दी थी।

लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं – सामाजिक तनाव और रखरखाव की कमी। इस नई नीति से उम्मीद है कि राज्य स्तर पर

एक समान प्रोटोकॉल बनेगा, जो अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल कायम करेगा।

निष्कर्ष: सम्मान और सुरक्षा का संतुलन

डॉ. आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस 2025 न सिर्फ स्मृति का दिन रहा, बल्कि भविष्य की दिशा भी निर्धारित करने

वाला साबित हुआ।

सीएम योगी की बाउंड्री वॉल वाली घोषणा आंबेडकर की विचारधारा को व्यावहारिक रूप से मजबूत करने का प्रयास है।

लेकिन सफलता तभी मिलेगी जब यह योजना धरातल पर उतरे और सभी वर्गों का विश्वास जीते। अंततः, बाबा साहब का

संदेश समानता और न्याय का है, जिसे हर स्तर पर अपनाना होगा।

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