Pakistan International Airlines Sold: घाटे में चल रही PIA आखिर किसके हाथ गई?

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Pakistan International Airlines Sold: पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को दिसंबर 2025 में आखिरकार बेच दिया गया। लंबे समय से घाटे में डूबी यह नेशनल कैरियर अब प्राइवेट कंसोर्टियम के हाथों में है, जो IMF के प्रेशर और आर्थिक सुधारों का नतीजा है।

Pakistan International Airlines Sold: PIA का संकट भरा सफर

PIA की स्थापना 1955 में हुई, लेकिन 2000 के बाद भ्रष्टाचार, ओवरस्टाफिंग और खराब मैनेजमेंट ने इसे बर्बाद कर दिया। 2025 तक इसके पर कर्ज 2.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया, जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बोझ बना। EU ने 2020 में सेफ्टी चिंताओं से उड़ानें बैन कर दीं। सरकार ने 80% कर्ज अपने बैलेंस शीट पर ले लिया, फिर भी प्राइवेटाइजेशन जरूरी हो गया।

प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया

IMF के 7 बिलियन डॉलर लोन की शर्त पर पाकिस्तान ने 75-100% स्टेक बेचने का फैसला लिया।
जून 2025 में पांच बिडर्स आए—फौजी फर्टिलाइजर (मिलिट्री बैक्ड), ब्लू वर्ल्ड सिटी, यबी होल्डिंग्स,
एयर ब्लू और अरिफ हबीब। जुलाई में चार को शॉर्टलिस्ट किया गया। 23 दिसंबर 2025 को लाइव
ऑक्शन में अरिफ हबीब लेड कंसोर्टियम ने 135 बिलियन रुपये (लगभग 480 मिलियन डॉलर) में
75% स्टेक खरीदा। बिडर को 500 मिलियन डॉलर तीन साल में निवेश करना होगा।

खरीदार कौन? अरिफ हबीब का कंसोर्टियम

अरिफ हबीब कॉर्पोरेशन पाकिस्तान का बड़ा फाइनेंशियल ग्रुप है, जो ब्रोकिंग, बैंकिंग और रियल एस्टेट में सक्रिय।

इस कंसोर्टियम में प्राइसिजन इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स (PAF का हिस्सा) भी शामिल, जो एविएशन में एक्सपर्ट।

वे फ्लीट अपग्रेड, स्टाफ कट और रूट्स बढ़ाने का प्लान लेकर आए। यह डील पाकिस्तान की

पहली बड़ी प्राइवेटाइजेशन है 20 सालों में।

सौदे के फायदे और चुनौतियां

  • फायदे: नया मालिक फ्लीट को मॉडर्न करेगा, जिससे EU बैन हटेगा। ऑपरेशनल प्रॉफिट 2024 में आया, जो बूस्ट मिलेगा। रोजगार बचेगा, टूरिज्म बढ़ेगा।
  • चुनौतियां: बाकी 220 बिलियन रुपये कर्ज बिडर को लेना पड़ेगा। यूनियंस विरोध कर रही। मिलिट्री कनेक्शन से पारदर्शिता पर सवाल।
    पाकिस्तान को 86 बिलियन रुपये प्राइवेटाइजेशन रेवेन्यू मिलेगा, जो अर्थव्यवस्था को सहारा देगा।

भारत के लिए क्या मतलब?

PIA की कमजोरी से एयर इंडिया और इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट को फायदा।

पाकिस्तानी रूट्स पर ट्रैफिक शिफ्ट होगा। लेकिन फौजी इन्वॉल्वमेंट से सिक्योरिटी रिस्क बढ़ सकता।

भारत सरकार सतर्क, क्योंकि PIA का इतिहास संदिग्ध रहा।

भविष्य की उम्मीदें

अरिफ हबीब PIA को मिडिल ईस्ट और यूरोप के हब बना सकता। अगर सफल, तो पाक SOEs की

प्राइवेटाइजेशन तेज होगी। लेकिन घाटे का इतिहास दोहराना न पड़े, इसके लिए सख्त मॉनिटरिंग जरूरी।

यह डील पाकिस्तान के आर्थिक पुनरुद्धार की पहली जीत है।

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