विशेष अभियान: दिल्ली मेट्रो आज सिर्फ यातायात का साधन नहीं, बल्कि महिला स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए एक जागरूकता क्रांति का केंद्र बन गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर “सुरक्षित शहर – स्वस्थ नारी” नाम से 15 दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया है। 10 दिसंबर से 25 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान में हर रोज 15 लाख से ज्यादा महिला यात्रियों तक सीधे पहुंच बना रहा है। मेट्रो स्टेशन होर्डिंग्स से लेकर ट्रेन के अंदर की दीवारें, सब एक ही संदेश दे रही हैं – “महिला सुरक्षित तो परिवार सुरक्षित, समाज सुरक्षित!”

विशेष अभियान: खास बातें सिर्फ पोस्टर नहीं, जीवंत संवाद
इस बार अभियान सिर्फ पोस्टर-बैनर तक सीमित नहीं है। हर बड़े स्टेशन – राजीव चौक, कश्मीरी गेट, हौज खास, नोएडा सिटी सेंटर – पर “नारी शक्ति कोना” बनाया गया है।
- दिल्ली पुलिस की महिला कमांडो टीम रोज सुबह 8 से 11 और शाम 5 से 9 बजे तक तैनात।
- फ्री सेल्फ-डिफेंस वर्कशॉप – 15 मिनट में पेपर स्प्रे, किक और पंच की ट्रेनिंग।
- पीरियड्स हेल्थ काउंटर: फ्री सैनिटरी पैड, आयरन की गोली और एनीमिया टेस्ट।
- 1091 हेल्पलाइन और Panic Button ऐप का लाइव डेमो।
पहले ही दिन 8,000 से ज्यादा महिलाओं ने सेल्फ-डिफेंस सेशन में हिस्सा लिया।
मेट्रो के अंदर की अनोखी पहल
मेट्रो ट्रेनों को “महिला स्वास्थ्य रथ” बनाया गया है। हर महिला कोच में:
- QR कोड लगे पोस्टर – स्कैन करने पर सीधे PCOS, ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की जानकारी हिंदी और अंग्रेजी में।
- ऑडियो एनाउंसमेंट: हर स्टेशन पर 30 सेकंड का जागरूकता मैसेज – “पीरियड्स में दर्द सहना बीमारी नहीं, इलाज करवाएं।”
- फ्री हेल्थ कार्ड: सफर के दौरान भरें, अगले स्टेशन पर डॉक्टर से फ्री कंसल्टेशन।
DMRC की MD वर्तिका शुक्ला ने कहा, “मेट्रो रोज 60 लाख लोगों को जोड़ती है। अगर हम रोज 10 लाख महिलाओं तक स्वास्थ्य और सुरक्षा का संदेश पहुंचा सकें, तो ये देश का सबसे बड़ा पब्लिक हेल्थ कैंपेन बनेगा।”
आंकड़े जो झकझोर देते हैं
अभियान की जरूरत क्यों पड़ी, ये आंकड़े बताते हैं:
- दिल्ली में हर तीसरी महिला को एनीमिया है।
- 18-35 आयु वर्ग में PCOS की शिकायत 35% तक पहुंच गई।
- मेट्रो में रोज औसतन 22 छेड़छाड़ की शिकायतें दर्ज होती हैं।
- 2025 में अब तक 1,800 महिलाएं मेट्रो में Panic Button दबा चुकी हैं।
इन आंकड़ों को बदलने के लिए ही मकसद से अभियान शुरू हुआ है।
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महिलाओं की जुबानी: असली बदलाव
राजीव चौक स्टेशन पर मिलीं नेहा शर्मा (24) ने बताया, “आज पहली बार किसी ने मुझे सिखाया कि पेपर स्प्र स्प्रे कैसे इस्तेमाल करना है। पहले डर लगता था, अब कॉन्फिडेंस आया।” कश्मीरी गेट पर कामकाजी मां रेखा यादव ने फ्री एनीमिया टेस्ट करवाया और बोलीं, “मुझे पता ही नहीं था कि थकान एनीमिया की वजह से है। आज दवा भी मिल गई।”
आगे की योजना: अभियान सिर्फ शुरुआत है
15 दिन बाद भी ये सिलसिला नहीं रुकेगा। DMRC ने ऐलान किया है:
- हर महीने के पहले बुधवार को “महिला स्वास्थ्य दिवस” मनाया जाएगा।
- सभी महिला कोच में स्थायी “हेल्थ कियोस्क” लगेंगे।
- 50 से ज्यादा स्टेशनों पर महिला CISF कर्मी बढ़ाई जाएंगी।
विशेष अभियान: अंतिम संदेश
दिल्ली मेट्रो ने साबित कर दिया कि जागरूकता के लिए बड़े-बड़े सेमिनार की जरूरत नहीं, बस सही जगह और सही तरीके से संदेश पहुंचाना काफी है। जब हर रोज लाखों महिलाएं मेट्रो में सफर करते हुए खुद को सुरक्षित और स्वस्थ महसूस करेंगी, तभी सचमुच “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा सार्थक होगा।