असम ट्रेन हादसा: हाथियों के झुंड से टकराई राजधानी एक्सप्रेस, कई की मौत, यात्री सहमे

Loading

असम ट्रेन हादसा: असम के होजाई जिले में आज तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जहां सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन हाथियों के झुंड से टकरा गई। इस भयानक हादसे में कम से कम आठ हाथियों की मौत हो गई, जबकि ट्रेन का इंजन समेत पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। सौभाग्य से ट्रेन में सवार किसी यात्री को चोट नहीं लगी, लेकिन यात्री घंटों पटरी पर अटके रहे और सहमे हुए रहे।

असम ट्रेन हादसा: हादसे की पूरी कहानी

यह हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ, जब ट्रेन असम के घने जंगलों से गुजर रही थी। लोको पायलट ने दूर से हाथियों का झुंड देख लिया और इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए, लेकिन रफ्तार इतनी तेज थी कि टक्कर टल न सकी। झुंड में आठ से अधिक हाथी थे, जिनमें एक बछड़ा भी शामिल था। टक्कर के असर से ट्रेन के इंजन और चार-छह डिब्बे पटरी से फिसल गए, जिससे पूरा इलाका थर्रा गया। स्थानीय लोग और वनकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। हाथियों के शवों को देखकर सब सन्न रह गए।

ट्रेन में सैकड़ों यात्री थे, जो नई दिल्ली की ओर जा रहे थे। वे अचानक झटके से सहम गए। एक यात्री ने बताया कि पहले तो लगा भूकंप आ गया, फिर खिड़की से हाथियों के झुंड का नजारा दिखा। यात्री घंटों अंधेरे में फंसे रहे, मोबाइल की रोशनी से एक-दूसरे को संभाला। रेलवे ने राहत कार्य तेज कर दिया, लेकिन ऊपरी असम और पूर्वोत्तर राज्यों की रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। कई ट्रेनें डायवर्ट की गईं।

असम ट्रेन हादसा: असम में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष

असम हाथियों का गढ़ है, लेकिन तेजी से बढ़ते मानवीय अतिक्रमण से हाथी बार-बार रेल पटरियों और सड़कों पर आ रहे हैं। होजाई क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक कॉरिडोर है, लेकिन रेलवे ट्रैक और बस्तियां बीच में आ गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई हादसे हो चुके हैं। 2018 में भी असम में ट्रेन से पांच हाथी मारे गए थे। 2022 में भी इसी तरह की घटना हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे को स्पीड लिमिट लगानी चाहिए और सेंसर बिछाने चाहिए। वन विभाग ने मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

यह घटना पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी को उजागर करती है। हाथी विलुप्त प्रजाति हैं,

और ऐसे हादसे उनकी संख्या घटा रहे हैं। सरकार को हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

रेलवे की प्रतिक्रिया और यात्रियों की परेशानी

रेलवे ने बयान जारी कर कहा कि ट्रेन को गुवाहाटी में ठीक किया जाएगा और

यात्रियों को अतिरिक्त कोच दिए जाएंगे। प्रभावित ट्रेनों के रूट बदले गए हैं।

एनएफ रेलवे के महाप्रबंधक ने जांच के आदेश दिए हैं। यात्रियों को खाना-पानी दिया गया,

लेकिन देरी से सब नाराज हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं,

जिसमें पटरी से उतरे डिब्बे और हाथियों के शव दिख रहे हैं।

आगे क्या सबक?

यह हादसा मानव और प्रकृति के बीच संतुलन की जरूरत बताता है।

रेलवे, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर समाधान निकालना होगा।

हाथी ट्रैक क्रॉसिंग के समय ट्रेनों की स्पीड कम हो, रात्रिकालीन गश्त बढ़े।

पर्यटकों और यात्रियों को जागरूक करना जरूरी है।

असम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसी ट्रेनिंग अनिवार्य हो।

Leave a Comment